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Allahabad High Court

ADILversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS

Decided

Holding

The court held that bail should be granted to the accused on the basis that the prosecution case has collapsed due to the hostile witness, subject to strict conditions.

Summary

The applicant, Adil, was charged under IPC sections 376(3), 376(1), 506 and POCSO Act sections 5(3) and 2/6 for alleged offences in Muradnagar, Ghaziabad. His first bail application (No. 24585/2024) was rejected, but he filed a second bail petition (No. 17750/2026). The defence argued that the principal prosecution witness, the victim, turned hostile and denied the applicant's involvement, thereby collapsing the prosecution case. The prosecution could not rebut the claim of the witness’s hostility. Considering the lack of substantive evidence and the risk of tampering, the court found sufficient ground to grant bail, subject to stringent conditions ensuring the applicant does not interfere with the investigation or trial. The court ordered the applicant’s release on bail with five specific conditions and retained the power to cancel bail if violated.

Issues considered

  • Whether bail can be granted when the principal prosecution witness has turned hostile and does not support the prosecution case.
  • Whether the absence of substantive evidence justifies the grant of bail.
  • Whether the court may impose conditions to prevent the accused from tampering with evidence or intimidating witnesses.

Legislation cited

Subjects

  • bail
  • criminal procedure
  • IPC
  • POCSO Act
  • hostile witness
  • conditions of bail
  • evidence

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
          CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 17750 of 2026

Adil
                                                                              .....Applicant(s)
                                           Versus

State Of U.P. And 3 Others
                                                                                 .....Opposite
                                                                                       Party(s)

Counsel for Applicant(s)                                    :    Rajnish Dubey
Counsel for Opposite Party(s)                               :    G.A.

Court No. - 75
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 174/2024,
अन्तर्गत धारा 376(3), 376(1), 506 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 5(3), 2/6 पाक्सो एक्ट, थाना
मुरादनगर, जिला गाजियाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का
परिशीलन किया।

3. आवेदक का यह द्वितीय जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम जमानत, जमानत आवेदन पत्र
सं० 24585/2024 में इस न्यायालय के इसी न्यायपीठ के आदेश दिनांक 11.11.2025 के द्वारा
निरस्त किया जा चुका है।

4. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने नवीन तर्क प्रस्तुत किया कि इस मामले के विचारण (Trial) के
दौरान मुख्य अभियोजन साक्षी सं० 2 (पीड़िता) ने अपने न्यायालयीन परीक्षण (Examination-in-
chief / Cross-examination) के दौरान अभियोजन पक्ष के कथानक (Prosecution Story) का
बिल्कु ल भी समर्थन नहीं किया है। पीड़िता ने अपने बयान में आवेदक की संलिप्तता से इनकार किया
है, जिसके परिणामस्वरूप उसे अभियोजन पक्ष द्वारा पक्षद्रोही (Hostile) घोषित किया जा चुका है।
इस महत्वपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए मामले का पूरा आधार समाप्त हो जाता है और आवेदक
जमानत का प्रबल अधिकारी है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया
है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह
ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तों को स्वीकार करने के
लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में
दि० 19.03.2024 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

5. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध किया, किंतु अभियोजन
                                                                                                           BAIL No. 17750 of 2026
                                                                             2


                                    साक्षी सं० 2 (पीड़िता) के पक्षद्रोही हो जाने के तथ्य का खंडन नहीं कर सके।

                                    6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं
                                    परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी भी ठोस
                                    विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को
                                    देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।

                                    7. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
                                    संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू प्रस्तुत
                                    करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                        1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।

                                        2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

                                        3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई अनावश्यक
                                            स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग
                                            करेगा।

                                        4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
                                            किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

                                        5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
                                            अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
                                            कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़

                                    8. उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की जमानत
                                    नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।



                                                                                               (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    September 30, 2026
                                    CP.sahani




Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad


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