Allahabad High Court
AJAY KUMARversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that bail must be granted as the prosecution failed to produce sufficient evidence and there was no risk of evidence tampering, subject to strict conditions.
Summary
The High Court considered a bail application filed by Ajay Kumar, who was arrested under IPC Section 64(A) and Sections 3 and 4 of the POCSO Act. The applicant contended that the allegations were false and that the victim’s testimony during trial indicated no assault or rape. The prosecution opposed bail, arguing the alleged offence was serious. After reviewing the evidence and finding no substantive material to suggest tampering or intimidation, the court concluded that bail was appropriate. The court granted bail with five specific conditions, including non‑interference with evidence and compliance with court orders.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused under IPC 64(A) and POCSO Act in view of the seriousness of the alleged offence.
- Whether the prosecution evidence is sufficient to deny bail.
- Whether the court can impose conditions to ensure the accused does not tamper with evidence or intimidate witnesses.
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 64(A)
- Protection of Children from Sexual Offences Act — s. 3, 4
Subjects
- bail
- IPC 64A
- POCSO Act
- false accusation
- criminal procedure
- conditions of bail
- evidence tampering
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 42058 of 2025
Ajay Kumar
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Ardhendu Shekhar Sharma, Ram Babu
Sharma
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 262/2025
, अन्तर्गत धारा 64(A) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 3/4 पाक्सो एक्ट, थाना कोतवाली
हाथरस, जिला हाथरस में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली
का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। यहां प्रासंगिक
तथ्य यह है कि इस मामलें के सत्र परीक्षण/परीक्षण में अभियोजन साक्षी सं० 2/पीड़िता द्वारा
अपने बयान में यह कथन किया गया कि कि अजय ने उसके साथ कोई छे ड़खानी नहीं की और
न ही बलात्कार किया। इस प्रकार अभियोजन साक्षी सं० 2/पीड़िता द्वारा अभियोजन कथानक
का समर्थन नहीं किया गया है। इसलिए, आवेदक जमानत पर मुक्त किये जाने योग्य है। पुनः
उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया
में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के
समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो
न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि०
05.09.2025 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क
प्रस्तुत किया कि अभियुक्त द्वारा कारित अपराध संंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति का है, इसलिए
अभियुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान
BAIL No. 42058 of 2025
2
तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी
भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना न
होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध
में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय
प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।
1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा
और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या
पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
, जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़
7. उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की
जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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