Allahabad High Court
DINANATH TIWARIversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The Court held that bail should be granted, subject to stringent conditions, as there was no material showing a risk of evidence tampering or witness intimidation.
Summary
Dinanath Tiwari was arrested on charges under IPC sections 61(2)(k), 64(1), 127(2), 351(2) and 352 and filed a bail application claiming he was falsely implicated and that his statement was obtained under coercion. He had been in custody since 8 August 2025 and sought release on bail. The State opposed the application, arguing the seriousness of the offences and the risk of the accused influencing witnesses. The Court examined the material, found no substantial likelihood of the applicant tampering with evidence or intimidating witnesses, and accepted his claim of false implication. Consequently, the Court granted bail subject to strict conditions, including no contact with co‑accused, no intimidation of witnesses, compliance with court orders and a prohibition on committing any offence while on bail.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused under the listed IPC sections despite the seriousness of the offences
- Whether there is a risk of the accused tampering with evidence or influencing witnesses if released on bail
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 127(2), 351(2), 352, 61(2)(k), 64(1)
Subjects
- bail
- false implication
- Indian Penal Code
- Criminal Procedure
- witness intimidation
- conditions of bail
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 42093 of 2025
Dinanath Tiwari
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Agnihotri Kumar Tripathi, Nishith
Tripathi, Sarvesh Kumar Dubey
Counsel for Opposite Party(s) : Akhilesh Kumar Singh, G.A., Virendra
Singh
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक दीनानाथ वा
ओर से मु.अ.सं० 69/2025 अ त धारा 64(1)/ 61(2)(क)/ 127(2)/ 351(2)/ 352
बी.एन.एस. एवं धारा 3/4 पॉ ए 3/5(1) उ र देश ध संप व न षेध
अ यम एवं धारा 66ई आई.टी. ए एवं धारा 16/17 पॉ ए , थाना प म श रा,
ला कौशा जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। मामले के
अ योजन सा सं. 02 पी ता ने अपने बयान कथन या दीनानाथ को पा वा क
रं श के कारण मु मान बनाया गया था। इ ने मेरा वी यो वायरल न या ता। इस
कार मामले उ सा प ही हो गयी। आवेदक ष है तथा वह इस करण ०
08.08.2025 से कारागार है इस ए आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
4. न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध
करते ए त त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है,
इस ए आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
5. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
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BAIL No. 42093 of 2025
2
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
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