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Allahabad High Court

VINOD KUMARversusSTATE OF U.P.

Decided

Holding

The court granted bail to the applicant under Section 64(1) IPC, subject to specified conditions.

Summary

The applicant, Vinod Kumar, filed a bail application under Section 64(1) of the Indian Penal Code in Criminal Misc. Bail Application No. 42318 of 2025, seeking release from custody pending trial. The applicant argued that he had previously been granted bail under Section 69 and Section 351(3) IPC by a lower court on 27‑10‑2025, and that the trial court incorrectly substituted Section 64(1) for Section 69 without new evidence, emphasizing the victim’s consent and the applicant’s willingness to cooperate with the investigation. The respondent opposed bail, contending that the alleged offence is cognizable and serious, warranting continued detention. After reviewing the record and noting the absence of any material contrary evidence or risk of tampering, the judge found sufficient grounds to grant bail. The court ordered the applicant’s release on bail subject to five conditions, including non‑interference with evidence, no intimidation of witnesses, compliance with court orders, and abstention from any criminal activity, and retained the power to cancel bail for any breach.

Issues considered

  • Whether bail can be granted under Section 64(1) IPC in light of the prior bail order under Section 69 and Section 351(3) IPC.
  • Whether the nature of the alleged offence justifies denial of bail.
  • Whether the applicant poses a risk of tampering with evidence or intimidating witnesses.

Legislation cited

Subjects

  • bail
  • Section 64(1) IPC
  • Section 69 IPC
  • Section 351(3) IPC
  • criminal procedure
  • conditions of bail
  • cognizable offence

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
           CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 42318 of 2025

Vinod Kumar
                                                                    .....Applicant(s)
                                           Versus

State of U.P.
                                                                        .....Opposite
                                                                              Party(s)

Counsel for Applicant(s)                            :   Prateek Srivastava
Counsel for Opposite Party(s)                       :   G.A.

Court No. - 71
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 953/2025
, अन्तर्गत धारा 64(1) भारतीय न्याय संहिता, थाना राबर्ट्सगंज, जिला सोनभद्र में जमानत
पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली
का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि इस मामलें में आवेदक को धारा 69,
351(3) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मा० न्यायालय के आदेश दिनांक 27.10.2025
के द्वारा जमानत प्रदान की गयी थी, किंतु विवेचक द्वारा विवेचना के दौरान बिना किसी
अतिरिक्त साक्ष्य के, केवल रिकॉर्ड पर उपलब्ध समान साक्ष्यों, अर्थात बी.एन.एस.एस. की धारा
180 एवं 183 के अंतर्गत पीड़िता के बयानों के आधार पर, विवेचक ने गलत तरीके से
बी.एन.एस. की धारा 69 को धारा 64(1) से प्रतिस्थापित कर दिया है, जबकि कथित पीड़िता
के बयानों से परिलक्षित है कि वह कथित पीड़िता सहमति देने वाली पक्षकार है तथा विवाहित
महिला है और 2.5 वर्षीय बच्चे की माँ भी है। इसलिए, आवेदक जमानत पर मुक्त किये जाने
योग्य है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह
कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह
ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तों को स्वीकार
करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह
इस प्रकरण में दि० 28.09.2025 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर
छोड़ दिया जाय।

4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क
प्रस्तुत किया कि अभियुक्त द्वारा कारित अपराध संंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति का है, इसलिए
                                                                                                      BAIL No. 42318 of 2025
                                                                          2


                                    अभियुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।

                                    5. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान
                                    तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी
                                    भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना न
                                    होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
                                    है।

                                    6. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध
                                    में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय
                                    प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                          1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।

                                          2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

                                          3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
                                             अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
                                             ईमानदारी से सहयोग करेगा।

                                          4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा
                                             और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

                                          5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या
                                             पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
                                             , जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़

                                    7. उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की
                                    जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।


                                                                                           (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    April 2, 2026
                                    CP.sahani




Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad


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