Allahabad High Court
ROHIT KUMAR SAHversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
Bail was granted to the accused subject to specified conditions.
Summary
Rohit Kumar Sah was arrested under sections 65(1) and 351(2) of the Indian Penal Code and sections 5L/6 of the POCSO Act for alleged sexual offences. The applicant contended that the accusation was false, citing the victim's age of 18, prior acquaintance, and lack of corroborative medical evidence. The prosecution argued that the alleged crime was serious and opposed bail. The court examined the evidence, found no substantive material to support the charges and noted the risk of tampering was minimal. Consequently, the court granted bail with stringent conditions including non‑interference with evidence, no intimidation of witnesses, and compliance with court orders. The bail may be revoked if any condition is breached.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused under sections 65(1), 351(2) IPC and POCSO Act in the absence of substantive evidence.
- Whether the seriousness of the alleged offence warrants denial of bail.
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 351(2), 65(1)
- Protection of Children from Sexual Offences Act — s. 5L, 6
Subjects
- bail
- Indian Penal Code
- POCSO Act
- false accusation
- evidentiary insufficiency
- court conditions
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 45980 of 2025
Rohit Kumar Sah
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Dinesh Kumar Gupta, Raghawendra
Singh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Nirbhay Kumar Bharti
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 362/2025
, अन्तर्गत धारा 65(1), 351(2) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 5एल/6 पाक्सो एक्ट,
थाना बैरिया, जिला बलिया में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. सूचनाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट लीगल सर्विसेस कमेटी की विद्वान अधिवक्ता भावना मिश्रा
द्वारा वकालतनामा दाखिल किया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, हाईकोर्ट लीगल सर्विसेस कमेटी की ओर से विद्वान अधिवक्ता
भावना मिश्रा एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन
किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। यहां प्रासंगिक
तथ्य यह है कि कथित पीड़िता के आयु परीक्षण प्रपत्र के अनुसार उसकी आयु अट्ठारह वर्ष है
तथा कथित पीड़िता के धारा 180 व 183 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बयान में यह
परिलक्षित हो रहा है कि वह आवेदक से पूर्व परिचित थी तथा आवेदक के पास आती-जाती रही
है, जो उसके सहमति देने की पुष्टि कर रहा है। कथित पीड़िता के चिकित्सीय परीक्षण प्रपत्र के
अनुसार भी अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं हो रहा है। इसलिए, आवेदक, जमानत पर
मुक्त किये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया
है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी
वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तों को स्वीकार
करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह
इस प्रकरण में दि० 29.09.2025 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर
छोड़ दिया जाय।
BAIL No. 45980 of 2025
2
4. हाईकोर्ट लीगल सर्विसेस कमेटी की विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता
ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अभियुक्त द्वारा कारित
अपराध संंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अभियुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान
तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी
भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना न
होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध
में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय
प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।
1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा
और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या
पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
, जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़
7. उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की
जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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