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Allahabad High Court

RAJENDRA SINGHversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS

Decided

Holding

Bail was granted to the accused subject to strict conditions.

Summary

The High Court considered a bail application filed by Rajendra Singh, who was arrested on 16‑10‑2025 in connection with offences under sections 137(2), 87, 65(1) of the B.N.S. Act and sections 3(2) and 4(2) of the POCSO Act. The alleged victim, a minor born on 22‑07‑2011, gave a statement indicating a consensual relationship with the accused and no coercion. The applicant’s counsel argued that the charges were false and that the victim’s testimony showed consent, while the State contended that the offences were grave and bail should be denied. The Court observed that the prosecution evidence was weak, there was no material to suggest tampering, and the victim’s statement suggested lack of force. Consequently, the Court granted bail with a set of stringent conditions, reserving the right to cancel bail on any breach.

Issues considered

  • Whether bail can be granted to an accused charged under the POCSO Act when the alleged victim, a minor, claims a consensual relationship.
  • Whether the material evidence on record is sufficient to justify denial of bail.
  • Whether the seriousness of the alleged offences outweighs the presumption of innocence in a bail context.

Legislation cited

Subjects

  • bail
  • POCSO
  • minor
  • consent
  • criminal procedure
  • section 137
  • section 180 IPC
  • high court

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
           CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 5428 of 2026

Rajendra Singh
                                                                         .....Applicant(s)
                                          Versus

State Of U.P. And 3 Others
                                                                             .....Opposite
                                                                                   Party(s)

Counsel for Applicant(s)                               :    Akhilendra Yadav
Counsel for Opposite Party(s)                          :    G.A.

Court No. - 65
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक रवेन्द्र सिंह की ओर
सेअपराध संख्या-287/2025 धारा-137(2), 87, 65(1) बी०एन०एस० व धारा-3/4(2)
पोक्सो एक्ट थाना-लाइनपार, जनपद फिरोजाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया
है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय
अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। पीड़िता की उम्
चिकित्सीय रिपोर् के मुताबिक 17 वर्ष होना अंकित है। कथित पीड़िता के धारा 180 भारतीय
नागरिक सुरक्षा संहिता के बयान में कथन किया कि मेरी जन्मतिथि 22.07.2011 है। मै
कक्षा 11 में महात्मा गाँधी इण्टर कॉलेज स्टेशन रोड में पढ़ती हूं। मै राजेन्द्र नाम के लड़के से
प्यार करती हूं। वो भी मुझसे प्यार करता है। उसने मुझे आगरा केन्ट रेलवे स्टेशन पर बुलाया मै
वहां चली गयी वहां से हम लोग तेलांगाना गये। फिर वहाँ पर हमने एक कमरा किराये पर लिया
हम दोनो पति पत्नी की तरह रहे। राजेन्द्र मुझसे शादी करना चाहता है। और मैं भी उससे शादी
करना चाहती हूं । फिर हम लोग वासप आ गये।

4. उक्त बयान अवलोकन से पीड़िता एक सहमत पक्षकार प्रतीत होती है, आवेदक द्वारा उसके
साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गयी। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह
आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी
आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी
शतों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक
निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 16.10.2025 से कारागार में निरुद्ध है इसलिए आवेदक
                                                                                                             BAIL No. 5428 of 2026
                                                                              2


                                    को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                    5. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने आवेदक के विद्वान
                                    अधिवक्ता के तर्को का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक द्वारा कारित अपराध
                                    संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृति का है, इसलिए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।

                                    6. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध
                                    सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और
                                    किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना
                                    न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
                                    है।

                                    7. अतः वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
                                    संबंधित न्यायालय की सन्तुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू
                                    प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                          1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।

                                          2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

                                          3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
                                               अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
                                               ईमानदारी से सहयोग करेगा।

                                          4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
                                               किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

                                          5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
                                               अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
                                               कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़

                                    उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत
                                    नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।



                                                                                                (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    March 18, 2026
                                    S.Mishra




Digitally signed by :-
SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad


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