Allahabad High Court
SANDEEP YADAVversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
Bail was granted on the ground that the evidence did not show a substantial risk of tampering or intimidation, subject to strict conditions.
Summary
The applicant, Sandeep Yadav, sought bail in a case registered under IPC sections 137(2), 87, 64(1) and sections 5 and 6 of the POCSO Act, alleging that the FIR was filed fraudulently and that the alleged victim was a consenting adult in a romantic relationship with him. The prosecution opposed bail, arguing the alleged offence was serious. The court examined the pleadings, noted the absence of substantive contrary evidence and the possibility of tampering with evidence, and concluded that bail was appropriate provided strict conditions were imposed. The court granted bail with five conditions, including non‑interference with evidence, no intimidation of witnesses, compliance with court orders, and abstention from any criminal activity. Violation of any condition would lead to revocation of bail.
Issues considered
- What is the applicability of bail under IPC sections 137(2), 87, 64(1) and POCSO Act sections 5 and 6 in the present case?
- Whether the alleged consent of the victim and the alleged falsity of the FIR justify granting bail?
- Whether the court can impose conditions on bail to prevent tampering with evidence and intimidation of witnesses?
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 137(2), 64(1), 87
- Protection of Children from Sexual Offences Act — s. 5, 6
Subjects
- bail
- IPC
- POCSO Act
- false accusation
- consent
- criminal procedure
- evidence tampering
- witness intimidation
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 6107 of 2026
Sandeep Yadav
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Ram Neta Singh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Satya Priya Mishra, Shashank
Shekhar Singh
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं०
772/2025, अन्तर्गत धारा 137(2), 87, 64(1) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 5
एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना खोराबार, जिला गोरखपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु
प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर
शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में
गलत एवं फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया
है। प्रथम सूचना रिपोर्ट विलंबित है, इसका कोई समुचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
यहां प्रासंगिक तथ्य यह है कि आवेदक व कथित पीड़िता के मध्य प्रेम संबंध था। कथित
पीड़िता द्वारा अपने धारा 180 व 183 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बयान में
आवेदक के साथ स्वेच्छा से जाने, विवाह कर लेने, पति-पत्नी की तरह रहने का कथन
किया गया है, केवल धारा 183 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बयान में मुझे बहला
-फुसला कर ले जाने का कथन किया गया। उपर्युक्त तथ्यों से परिलक्षित हो रहा है कि
कथित पीड़िता सहमति देने वाली पक्षकार है। आगे यह भी कहा गया कि कथित पीड़िता
के आयु परीक्षण प्रपत्र के अनुसार उसकी आयु लगभग साढ़े सत्रह वर्ष है। इसलिए,
आवेदक जमानत पर मुक्त किये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर
से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार
है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध
कराएगा और उन सभी शर्तों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस
पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 08.01.2026 से
BAIL No. 6107 of 2026
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कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।
4. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के
जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अभियुक्त द्वारा कारित अपराध
संंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अभियुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध
सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की
प्रकृति और किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से
छे ड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर
मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित
अपराध में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के
दो स्थानीय प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया
जाय।
1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं
करेगा।
2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा
नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण
में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही
करेगा और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक
कृत्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति
या पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई
वायदा करेगा, जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत
रहना पडे।़
7. उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की
जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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