Allahabad High Court
SANTOSH PALversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that, given the lack of substantive evidence and the low likelihood of evidence tampering, the accused is entitled to bail subject to strict conditions.
Summary
The applicant, Santosh Pal, was arrested in connection with FIR No. 70/2025 alleging offences under Sections 74, 352, 351(3) and 69 of the Indian Penal Code. He claimed the allegations were false, motivated by personal enmity, and that the FIR was lodged with undue delay. The prosecution argued that the alleged offences were cognizable and serious, opposing bail. The court examined the available material, noted the absence of substantive evidence and the risk of tampering, and concluded that bail was appropriate. Accordingly, the court released the applicant on bail subject to stringent conditions regarding non‑interference with evidence, non‑threatening of witnesses, compliance with court orders, and abstention from any criminal activity. The bail order also stipulated that any breach of conditions would lead to revocation of bail.
Issues considered
- What is the appropriateness of granting bail to the accused in light of the seriousness of the alleged offences and the evidentiary material?
- Whether the risk of tampering with evidence or influencing witnesses justifies denial of bail?
Subjects
- bail
- Criminal Procedure Code
- presumption of innocence
- evidence tampering
- conditions of bail
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8418 of 2026
Santosh Pal
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Santosh Kumar Singh, Swapnil Gupta
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक संतोष पाल की ओर से
मु.अ.सं० 70/2025 अन्तर्गत धारा 74/ 352/ 351(3)/ 69 बी.एन.एस., थाना राजगढ़, जिला
मिर्जापुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का
परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट
विलम्ब से दर्ज करायी गयी है। जिसका कोई समुचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। वादिनी व
उसके परिवार द्वारा आवेदक को व्यक्तिगत रंजिश के कारण उक्त मुकदमें में झूंठा फंसाया गया
है। इससे पूर्व भी उक्त मुकदमें की तरह पीड़िता द्वारा मु.अ.सं. 0180/2022 अंतर्गत धारा
363/ 366/ 376/ भा.दं.सं., एवं 3/4 पॉक्सो एक्ट के माध्यम से अन्य व्यक्ति को भी
अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए उक्त धाराओं का आरोप लगाया। इसी परिप्रेक्ष्य में पीड़िता
की बहन द्वारा भी अन्य अभियुक्त को फंसाया गया। पीड़िता का पूर्व इतिहास देखकर यही
प्रतीत होता है कि पीड़िता ऐसे आरोप लगाने में और अनुचित लाभ कमाने की अभ्यस्त है। पुनः
उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में
सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष
खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय
उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 11.02.2026 से
कारागार में निरुद्ध है इसलिए आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्को का प्रबल विरोध
करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक द्वारा कारित अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृति का है,
BAIL No. 8418 of 2026
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इसलिए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध
सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और
किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना
न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
संबंधित न्यायालय की सन्तुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू
प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।
1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़
उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत
नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
S.Mishra
Digitally signed by :-
SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad
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