Allahabad High Court
PARVEZversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that bail should be granted with conditions, as there was no material evidence to deny the applicant’s liberty.
Summary
The applicant, Parvez, was arrested in FIR No. 184/2025 under IPC sections 69 and 351(2) and applied for bail. He alleged that the case was false, that he was threatened by the police, and that he had not committed any offence. The State opposed bail, arguing the seriousness of the charges. The Allahabad High Court examined the applicant’s claim of false implication, the lack of solid evidence, and the possibility of the applicant influencing witnesses. Finding no substantial risk of tampering or threat to the investigation, the Court ordered that bail be granted subject to strict conditions, including non‑interference with the investigation and compliance with court directives. The bail order was pronounced on 19 March 2026.
Issues considered
- Whether bail can be granted in a case involving IPC sections 69 and 351(2) despite the seriousness of the offences.
- Whether the applicant’s claim of a false case and alleged police intimidation affect the bail decision.
- Whether imposing conditions on bail is appropriate to safeguard the investigation.
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 351(2), 69
Subjects
- bail
- IPC section 69
- IPC section 351(2)
- false case allegation
- police intimidation
- Allahabad High Court
- criminal procedure
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9070 of 2026
Parvez
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Kushagra Srivastava, Shahrukh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक परवेज ओर से
मु.अ.सं० 184/2025 अ त धारा-69, 351(2) बी.एन.एस. थाना-बाबूग , ला- हापु
जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। मामले के
अ योजन सा सं. 02 पी ता ने अपने बयान कथन या मुझे दरोगाजी ने डरा
धमका या था, स कारण ने परवेज के लाफ बयान या था। पर वा व परवेज
ने ना तो मेरे साथ बला र या था ना ही जान से मारने धम दी थी। आवेदक ष है
तथा वह इस करण ० 21.08.2025 से कारागार है इस ए आवेदक को
जमानत पर छो या जाय।
4. न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध
करते ए त त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है,
इस ए आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
5. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
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BAIL No. 9070 of 2026
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6. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
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SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad
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