Allahabad High Court
MOHAMMAD AADILversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The Court denied bail, holding that the seriousness of the charges and lack of convincing evidence of fabrication warrant the continuation of custody.
Summary
Mohammad Aadil applied for bail before the Allahabad High Court in Criminal Miscellaneous Bail Application No. 9295 of 2026, seeking release on charges under IPC sections 302, 64, 123 and IT Act section 66E. The applicant alleged that the case was fabricated, that the alleged victim had falsely lodged the complaint, and that he had no involvement in the alleged offences. The State opposed the bail, contending that the allegations involved serious offences including murder and that the applicant was already in custody since 14 October 2025. The Court examined the material on record, found the allegations of a false case unsubstantiated, and noted the seriousness of the offences and the risk to the investigation. Consequently, the Court dismissed the bail application, refusing to grant bail to the applicant.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused in a case involving IPC sections 302, 64, 123 and IT Act section 66E.
- Whether the allegations of a fabricated case and false complaint are sufficient to merit bail.
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 123, 180, 183, 302, 64
- Information Technology Act, 2000 — s. 66E
Subjects
- bail
- IPC
- section 302
- section 66E
- criminal procedure
- false allegations
- murder
- Allahabad High Court
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9295 of 2026
Mohammad Aadil
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Kushagra Srivastava, Shahrukh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प आवेदक मो. आ ल ओर
से मु०अ०सं० 302/2025, अ त धारा धारा-64/ 123 बी.ए .एस. एवं 66ई आई.टी.
ए थाना- नौच , ला मेरठ जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली
का प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। सने पी ता के
साथ बला र घटना का त है। उस पी ता के साथ बात चली थी पंरतु
वादनी मुकदमा ता गलत हरक से तंग आकर वाली बात ख हो गयी थी इसी नरण
पी ता ने यह झूठा मुकदमा कायम करा या। उसने पी ता को कोई नशीला पदा नही
लाया। उसको शादी से इंकार करने पर झूठा फंसाया गया है। उसने पी ता के मोबाइल से
कोई फोटो न बनाये न ही सी को भेजे। घटना 2022-2023 बताई गयी है और सोच
समझकर 2025 मनगढत त पर मुकदमा कायम करा या गया है। उसका केस से कोई
स ध नही है। /अ यु सी भी सह अ यु को न जानता न ही पहले सी से
ला है। पुनः उनका कथन है आवेदक ओर से यह आ सन या गया है वह
कानून या सहयोग करने के ए तैयार है और जब भी आव कता होगी वह
ईमानदा से अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और उन सभी श को कार
करने के ए भी तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी। आवेदक ष है तथा वह
इस करण ० 14.10.2025 से कारागार है इस ए आवेदक को जमानत पर
छो या जाय।
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BAIL No. 9295 of 2026
2
न अपर शास य अ व ने अ यु के जमानत का बल रोध करते ए त
त या 4. पी ता ने अपने धारा 180 बी.एन.एस. एवं धारा 183 बी.एन.एस. के
बया कथन या त र अ बर ( नाँक याद न ) 2022 आ ल ने मुझे हापु
अ पर लने के ए बुलाया। आ ल मुझे होटल डायमंड, शोहराव गेट बस अ के पास एक
कमरे ले गया। वहाँ आ ल ने एक कमरा बुक या और कमरे जाकर मुझे एक को
क लाई। को क पीते ही मुझे होश न रहा। बेहोशी आ ल ने मे म के
मेरे कपडे उतारकर मेरा बला र या और न अव 2 मे फोटो और वी यो बनाई।
आ लउ फोटो और वी को खाकर मुझे कमेल करके लगभग 7-8 बार बुलाया।
डर वजह से चली जाती थी। आ ल ने इं म पर मेरे नाम से आई० ० भी बनाई थी।
अ बर 2023 के बाद भी आ ल लगातार कमेल करके बुलाता था, ले न ने जाना बंद
कर या। मुझे फोटो व वी यो वायरल करने का डर हमेशा से था पर मैने जाना बंद कर
या था आ ल हमेशा मेरे साथ जबरद संबंध बनाता और मुझसे शादी करने से भी
इंकार कर या था। मे शादी ० 14.06.2025 को ना म पु अनवर अली के साथ ई
है। आ ल ने मे शादी के बाद अग 2025 मेरे प ना म के फोन पर मेरे मैसेज फोटो
व वी यो भेजी इससे पहले व 2024 अग के महीने जहाँ नौक करती थी। वहाँ
आ ल मुझे परेशान करता था। तथा थत घटना मु भू का आवेदक एवं सह भयु
आशीष घल है। आवेदक रा का त अपराध गंभीर व जघ कृ का है। इस ए,
अ यु को जमानत पर पर न छो जाय।
5. व मान मामले जमानत संबंधी के त को न रखते ए एवं उभय
प का के नअ व के कथ , आरो कृ , आवेदक भू का और इस
माम के इस त को न रखते ए गुण-दोष पर ना कोई चार ए यह
जमानत आवेदन प कार ए जाने यो न है। अतः यह जमानत आवेदन प
अ कार या जाता है।
6. त सार, यह जमानत आवेदन प र या जाता है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 18, 2026
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