Allahabad High Court
NAIM KHAN @ NAJAMUDDIN KHANversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that the applicant is entitled to bail, subject to conditions, as the evidence is insufficient to justify its denial.
Summary
The High Court considered a bail application filed by Naim Khan (applicant) under Section 64(1) of the CrPC in connection with offences under Sections 123 and 351(3) of the IPC. The applicant claimed he was falsely implicated, pointing out inconsistencies in the FIR dates and lack of photographic or video evidence. The prosecution argued that the alleged offences were serious and bail should be denied. After reviewing the record, the court found the evidence insufficient and the possibility of tampering low, and therefore ordered the applicant to be released on bail subject to strict conditions. The order also stipulated that any breach of the conditions would lead to cancellation of bail.
Issues considered
- Whether the applicant is entitled to bail under Section 64(1) of the CrPC given the nature of the alleged offences.
- Whether the material evidence on record is sufficient to justify denial of bail.
- Whether inconsistencies in the FIR and alleged lack of corroborative video/photo evidence affect the bail decision.
Legislation cited
- B.N.S. — s. 180, 183
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 64(1)
- Indian Penal Code — s. 123, 351(3)
Subjects
- bail
- Criminal Procedure Code
- Indian Penal Code
- false accusation
- evidence
- court conditions
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9339 of 2026
Naim Khan @ Najamuddin Khan
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Brijesh Kumar Yadav
Counsel for Opposite Party(s) : Anita Singh, G.A., Prem Babu Verma
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक नईम खान की ओर से
मु.अ.सं० 10/2026 अन्तर्गत धारा 64(1)/ 123 & 351(3) बी.एऩ.एस., थाना शिकारपुर,
जिला बुलन्दशहर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय
अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट
के अनुसार घटना दिनांक 21.10.2025 की होने का कथन किया गया है जबकि प्रथम सूचना
रिपोर्ट दिनांक 18.01.2026 को दर्ज करायी गयी। जिसका कोई समुचित स्पष्टीकरण नहीं दिया
गया। पीड़िता द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट एवं अंतर्गत धारा 180/183 बी.एऩ.एस.एस. में वीड़ियो
वायरल करने का कथन किया गया जबकि उक्त के संबंध में कोई भी फोटो व वीड़ियों पत्रावली पर
उपलब्ध नहीं है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह
कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी
से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के लिए भी
तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि०
20.01.2026 से कारागार में निरुद्ध है इसलिए आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।
4. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने आवेदक के विद्वान
अधिवक्ता के तर्को का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक द्वारा कारित अपराध
संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृति का है, इसलिए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध
BAIL No. 9339 of 2026
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सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और
किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना
न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
संबंधित न्यायालय की सन्तुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू
प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।
1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़
उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत
नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
S.Mishra
Digitally signed by :-
SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad
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