Allahabad High Court
MOHD KAIFversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
Bail was granted to the applicant subject to stringent conditions.
Summary
The applicant, Mohd Kaif, sought bail in a criminal case (M.A. No. 69/2025) alleging offences under IPC sections 64(1), 61(2)(k), 127(2), 351(2) and 352. He contended that the allegations were false, that he was falsely implicated, and that the prosecution’s evidence was weak. The State opposed bail, arguing that the charges were serious and that the applicant might tamper with evidence or influence witnesses. The Court examined the material on record, noted the lack of substantive proof and the applicant’s claim of innocence, and considered the balance between the right to liberty and the interests of justice. Accordingly, the Court granted bail with a set of strict conditions, including non‑interference with the investigation, no intimidation of witnesses, and compliance with all court orders. The bail order was pronounced on 19 March 2026.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused under the provisions of the Indian Penal Code and the Code of Criminal Procedure given the nature of the offences alleged
- Whether the applicant poses a risk of tampering with evidence or influencing witnesses
- Whether the conditions imposed are sufficient to safeguard the trial process
Legislation cited
- Indian Penal Code — s. 127(2), 351(2), 352, 61(2)(k), 64(1)
Subjects
- bail
- criminal procedure
- Indian Penal Code
- presumption of innocence
- court conditions
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9340 of 2026
Mohd Kaif
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Vishesh Kumar
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक मो. कैफ ओर से
मु.अ.सं० 69/2025 अ त धारा 64(1)/ 61(2)(क)/ 127(2)/ 351(2)/ 352
बी.एन.एस. एवं धारा 3/4 पॉ ए 3/5(1) उ र देश ध संप व न षेध
अ यम, थाना प म श रा, ला कौशा जमानत पर मु करने हेतु त या गया
है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। मामले के
अ योजन सा सं. 02 पी ता ने अपने बयान कथन या मेरा सी ने ध
प व न न कराया न ही मुझे सी ने ब ई ले जाने बात कहा कैफ को न जानती न
ही कैफ ने मेरे साथ कोई गलत काम या। इस कार मामले उ सा प ही हो
गयी। आवेदक ष है तथा वह इस करण ० 26.07.2025 से कारागार है
इस ए आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
4. न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध
करते ए त त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है,
इस ए आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
5. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
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BAIL No. 9340 of 2026
2
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
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High Court of Judicature at Allahabad
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