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Allahabad High Court

ARVINDversusSTATE OF U.P.

Decided

Holding

Bail was granted subject to stringent conditions.

Summary

The Allahabad High Court considered bail application No. 9354 of 2026 filed by Arvind, who was arrested under sections 64(1) and 351(3) of the B.N.S. at Khoda police station, Ghaziabad. The applicant contended that the allegations were false, pointing to contradictions in the victim’s statements and asserting his innocence. The State opposed bail, arguing that the alleged offence was cognizable and serious. After reviewing the record, the court found no substantive evidence and no risk of tampering or intimidation, and therefore ordered the applicant’s release on bail. The bail was conditioned on non‑interference with evidence, no intimidation of witnesses, compliance with court orders, and abstention from any further criminal activity, with revocation possible upon breach.

Issues considered

  • Whether the applicant is entitled to bail despite being in custody under sections 64(1) and 351(3) of the B.N.S.
  • Whether there is a likelihood of evidence tampering or witness intimidation that justifies denial of bail

Legislation cited

Subjects

  • bail
  • criminal procedure
  • evidence
  • witness intimidation
  • conditions of bail
  • presumption of innocence

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
           CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9354 of 2026

Arvind
                                                                      .....Applicant(s)
                                           Versus

State of U.P.
                                                                           .....Opposite
                                                                                 Party(s)

Counsel for Applicant(s)                            :   Atul Kumar Kushwaha
Counsel for Opposite Party(s)                       :   G.A.

Court No. - 65
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक अरविन्द की ओर से
मु.अ.सं० 30/2026 अन्तर्गत धारा 64(1)/ 351(3) बी.एऩ.एस., थाना खोड़ा, जिला
गाजियाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का
परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। पीड़िता ने अपने
अंतर्गत धारा 180/183 बी.एऩ.एस.एस. के बयानों के अवलोकन से पीड़िता एक सहमत पक्षकार
प्रतीत होती है। क्योकि पीड़िता द्वारा घटना जनवरी माह की होने का कथन किया गया है, और
पीड़िता द्वारा कथन किया गया कि वह दरवाजा बन्द करके नहीं सोती है। यह बात अपने आप में
विवादास्पद लगती है कि जनवरी माह में जब कडाके की ठं ड होती है तब पीड़िता द्वारा दरवाजा
खोलकर सोने का कथन किया गया। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन
दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता
होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को
स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है
तथा वह इस प्रकरण में दि० 20.01.2026 से कारागार में निरुद्ध है इसलिए आवेदक को जमानत
पर छोड़ दिया जाय।

4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्को का प्रबल विरोध
करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक द्वारा कारित अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृति का है,
इसलिए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
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                                                                              2


                                    5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध
                                    सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और
                                    किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना
                                    न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
                                    है।

                                    6. अतः वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
                                    संबंधित न्यायालय की सन्तुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू
                                    प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                          1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।

                                          2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

                                          3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
                                               अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
                                               ईमानदारी से सहयोग करेगा।

                                          4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
                                               किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

                                          5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
                                               अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
                                               कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे।़

                                    उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत
                                    नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।




                                                                                                (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    March 19, 2026
                                    S.Mishra




Digitally signed by :-
SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad


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