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Allahabad High Court

PIYUSH MISHRAversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER

Decided

Holding

The Court held that the application under Section 528 BNSS is not maintainable and therefore dismissed it.

Summary

The applicant, Piyush Mishra, filed an application under Section 528 of the BNSS seeking to set aside a provisional order dated 30.05.2025 passed by the Family Court, Prayagraj, in a matrimonial dispute involving alleged dowry harassment. The respondent (State of U.P. and another) had filed a FIR under sections 85, 352, 74 of the Indian Penal Code and sections 3/4 of the Dowry Prohibition Act, leading to criminal proceedings (case no. 0016/2025). The applicant challenged the FIR and related notice through a criminal miscellaneous application, which the High Court referred to mediation and granted interim protection, noting the dispute was matrimonial and could be settled by agreement. The respondent argued that no substantive order had been passed, rendering the Section 528 application untenable. After hearing both sides, the Court held that the Section 528 application was not maintainable and dismissed it, directing the order be annulled and a copy sent to the lower court.

Issues considered

  • Whether the application under Section 528 of the BNSS is maintainable to set aside the provisional order of the Family Court.
  • Whether the FIR and notice under sections of the IPC and Dowry Prohibition Act render the matrimonial dispute a criminal matter beyond the scope of Section 528 relief.

Legislation cited

Subjects

  • Section 528 application
  • BNSS
  • family law
  • dowry harassment
  • interim protection
  • criminal proceedings
  • order set aside
  • mariage dispute

Judgment

          HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
                 APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 13547 of 2026

Piyush Mishra
                                                                .....Applicant(s)
                                     Versus

State of U.P. and Another
                                                                    .....Opposite
                                                                          Party(s)

Counsel for Applicant(s)                      :   Vinay Kumar Pandey
Counsel for Opposite Party(s)                 :   G.A.

Court No. - 82
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत प्रस्तुत यह आवेदन पत्र,
वाद सं० 0531 वर्ष 2025, अंतर्गत धारा 144 बी.एन.एस.एस., थाना महिला थाना
सिविल लाइन्स, जनपद प्रयागराज में प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, प्रयागराज
द्वारा पारित प्रश्नगत आदेश दिनांकित 30.05.2025 के विरूद्ध तथा साथ ही इस वाद की
संपर्ण
     ू कार्यवाही को खण्डित करने हेयु योजित किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना एवं
पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि आवेदक का विवाह विपक्षी संख्या-2 के
साथ दिनांक 25.06.2018 को हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ
था। आवेदक या उनके परिवार के सदस्यों को कोई दहेज या उपहार नहीं दिया गया था।
आवेदक संख्या-1 एक अल्प आय वाला व्यक्ति है और एक निजी कंपनी में निजी नौकरी
कर रहा है। यहां, उल्लेखनीय है कि विपक्षी संख्या-2 द्वारा अपने पिता के साथ परामर्श
कर स्वयं एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी रची और अपने पिता के माध्यम से आवेदक
और उसके पूरे परिवार के सदस्यों के विरुद्ध थाना- महिला थाना, जिला- प्रयागराज में
दिनांक 06.05.2025 को समय लगभग शाम 19:31 बजे प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई
गयी। उक्त प्रथम सूचना रिपोर्ट भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 352, 74 सहपठित
दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए केस अपराध
संख्या 0016/2025 के रूप में दर्ज की गई, जिसमें आवेदक के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल
किया जा चुका है। तत्पश्चात, आवेदक ने उपर्युक्त आरोप पत्र और सम्मन आदेश को इस
माननीय न्यायालय के समक्ष 'क्रिमिनल मिसलेनियस एप्लीकेशन संख्या 51781/2025 (
पीयूष कुमार मिश्रा एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य') के माध्यम से चुनौती
दी। इस माननीय न्यायालय ने मामले को मध्यस्थता एवं सुलह कें द्र, इलाहाबाद को
                                                                                                NA528 No. 13547 of 2026
                                                                      2

                                    संदर्भित किया है और अपने आदेश दिनांक 16.02.2026 द्वारा आवेदक और उसके
                                    परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की। इससे परिलक्षित है कि पति-पत्नी के बीच
                                    विवाद वैवाहिक प्रकृति का है, जिसे समझौते के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। आगे
                                    यह भी कहा गया कि विपक्षी संख्या-2 ने आवेदक के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा
                                    संहिता की धारा 144 (पुरानी धारा 125 Cr.P.C.) के तहत वाद संख्या 531/2025 'शिप्रा
                                    मिश्रा बनाम पीयूष कुमार मिश्रा' भी दायर किया है, जो विचारण अदालत में लंबित है
                                    तथा आवेदक को नोटिस निर्गत किया गया है, जो सुसंगत तौर से विचारित किये बिना ही
                                    पारित किया गया है। उपर्यक्त तथ्यों से परिलक्षित है कि प्रश्नगत आदेश खण्डित किये
                                    जाने योग्य है।

                                    4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता का कथन है कि प्रश्नत आदेश में संबंधित विचारण
                                    न्यायालय द्वारा अभियुक्त को धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत
                                    नोटिस निर्गत किया गया है, इसमें संबंधित विचारण न्यायालय द्वारा कोई प्रश्नगत आदेश/
                                    निर्णय पारित नहीं किया गया है। इस स्तर पर यह आवेदन पत्र पोषणीय नहीं है। इसलिए
                                    , आवेदक द्वारा प्रस्तुत यह आवेदन पत्र निरस्त किये जाने योग्य है।

                                    5. उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों
                                    के परिशीलन तथा स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, यह धारा 528 बी.एन.एस.
                                    एस. के अंतर्गत प्रस्तुत आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। अतः इस मामलें
                                    के गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए आवेदन पत्र अस्वीकार किया जाता है।

                                    6. तद्नुसार, धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत प्रस्तुत इस आवेदन पत्र को निरस्त
                                    किया जाता है।
                                    7. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर
                                    न्यायालय को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।
                                    8. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय।


                                                                                      (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    April 20, 2026
                                    CP.sahani




Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad


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