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Allahabad High Court

VIMALA SHAHIversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER

Decided

Holding

The High Court held that the trial court’s order was legally sound and not vitiated by any procedural or substantive defect, and therefore the application under Section 528 must be dismissed.

Summary

The applicant, Vimala Shahi, a senior citizen of about 81 years, filed an application under Section 528 of the Indian Civil Security Code seeking the setting aside of an order dated 06.04.2026 in case 1735/2025 (Mahesh Shahi v. Sanjay Singh & Others). She alleged that her son and his family had forcibly taken her to Gorakhpur, deprived her of care, and misappropriated her jewelry, leading to criminal complaints under Section 223. The trial court had taken cognizance of the complaint and scheduled a statement under Section 223, but the applicant contended that the order was not based on proper evidence and should be vacated. The opposing party argued that the order was legally sound and that the application was premature. The High Court examined the record, found no procedural or substantive infirmity in the trial court's order, and consequently dismissed the application under Section 528. The order was directed to be communicated to the lower court.

Issues considered

  • Whether the order passed by the trial court under Section 223 of the Indian Civil Security Code is liable to be set aside under Section 528.
  • Whether the applicant’s allegations of forced removal and misappropriation constitute a ground for vacating the trial court’s order.
  • Whether the application is premature and lacks merit for interference with the trial court’s findings.

Legislation cited

  • Indian Civil Security Code — s. 223, 528

Subjects

  • Section 528
  • Section 223
  • application under Section 528
  • interim order
  • senior citizen protection
  • court order review
  • dismissal

Judgment

         HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
                 APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 17234 of 2026

Vimala Shahi
                                                             .....Applicant(s)
                                    Versus

State of U.P. and Another
                                                                 .....Opposite
                                                                       Party(s)

Counsel for Applicant(s)                      :    Ved Byas Mishra
Counsel for Opposite Party(s)                 :    G.A.

Court No. - 82
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. आवेिदका की ओर से धारा 528 भारतीय सुर्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन प्ऴ,
वाद सं० 1735/2025 (महेश शाही बनाम संजय िसह व अन्य) जो िसिवल जज (
जू०िड०) एफ.टी.सी., क्ष सं० 2, देविरया ्षारा पािरत ्ऺसं्ञान/आदेश िदनांक
06.04.2026 को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।

2. आवेिदका के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा
प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेिदका के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक िवप्षी संख्या-२, आवेदक का
पु्ऴ है और आवेिदका की आयु लगभग 81 वषर् है। आवेिदका के पित की मृत्यु
10.02.2024 को गुदरॏ की बीमारी के कारण हो गई थी और आवेिदका ने अपना एक गुदार्
दान िकया था, िकतु वे जीिवत न रह सके। अपने पित की मृत्यु के प्ाात,
आवेिदका अपने पु्ऴ के साथ देविरया में रहने लगी और वह वृ्धावस्था की शारीिरक
बीमािरयों से भी ्षिसत है, िकतु उसका पु्ऴ उसकी देखभाल नहीं कर रहा था।
इसिलए आवेिदका ने गोरखपुर िस्थत अपने मायके जाने का िनणर्य िलया और अपने
चचेरे भाई एवं भतीजों को गोरखपुर बुलाया तािक वहां उसे बेहतर उपचार िमल सके,
क्योंिक उसका पु्ऴ न तो उसके साथ अच्छा ्िवहार कर रहा था और न ही उसके उपचार
की उिचत ्िवस्था कर रहा था तथा वह आवेिदका को उसके चचेरे भाई और भतीजों के
साथ भेजने के िलए भी तैयार नहीं था। िदनांक ३० अ्ऺैल, २०२५ को उसके भतीजे
सौरभ िसह व आिदत्य िसह तथा चचेरे भाई राम कुमार िसह आवेिदका को अपने साथ ले
जाने के िलए आए, िकतु उसका पु्ऴ तैयार नहीं था और उसके िलए उन्होंने एक शपथ-
प्ऴ तैयार िकया और आवेिदका के हस्ता्षर ्ऺाप्त िकए तथा आवेिदका ने अपने कल्याण
को ध्यान में रखते हुए उस पर हस्ता्षर कर िदए। तत्प्ाात, ३ मई, २०२५
को आवेिदका के अनुरोध पर उसकी पु्ऴी िमथलेश िसह पत्नी संजय कुमार िसह
गोरखपुर आई और आवेिदका को अपनी स्वतं्ऴ इच्छा से और िबना िकसी दबाव के
                                                        NA528 No. 17234 of 2026
                                2

अपने साथ झाँसी ले गई। इसके उपरांत, आवेिदका को यथाथर् सुपर स्पेशिलस्ट
अस्पताल में भतर् कराया गया और वह िदनांक 08.05.2025 से 12.05.2025 तक भतर्
रही। आवेिदका कैंसर से पीिड़त है और उसका उपचार झाँसी एवं ग्वािलयर में चल रहा
था और यिद वह अपनी पु्ऴी के पास न आती, तो उसका जीवन नहीं बचाया जा सकता
था। िवप्षी संख्या-२ ने िदनांक 09.07.2025 को मुख्य न्याियक मिजस््िेट, देविरया के
सम्ष चार ्िि्वयों, यथा संजय कुमार िसह (दामाद) पु्ऴ ्शीकांत िसह, िमथलेश िसह
पत्नी संजय कुमार िसह, ्ऺदीप िसह दामाद आसमान िसह और अचर्ना िसह पत्नी ्ऺदीप
िसह के िवरु्ध उपरो्व आपरािधक पिरवाद दायर िकया, िजसमें आरोप लगाया गया िक
वे आवेिदका को उसकी स्वतं्ऴ इच्छा के िवरु्ध जबरन ले गए हैं और उसकी पत्नी के
कब्जे से मूल्यवान आभूषण भी ले गए हैं। तत्प्ाात, िव्षान न्यायालय ने पिरवाद पर
सं्ञान िलया और बी.एन.एस. की धारा २२३ के तहत बयान दजर् करने हेतु 26.11.2025
की ितिथ िनधार्िरत की। िवप्षी संख्या-२ का बयान 09.11.2025 को दजर् िकया गया है
िजसमें उसने एक दूसरी कहानी बताई है और कहा है िक उसकी माँ अपनी बहन (
आवेदक की पु्ऴी) के साथ गई है। बयान में ितिथ और समय का उल्लेख नहीं िकया गया
है, अतः उ्व बयान िवरोधाभासी है। इसिलए, आवेिदका का धारा 223 भारतीय नागिरक
सुर्षा संिहता का बयान अंिकत कराने हेतु िनदरॏिशत िकया जाय। उपरो्व तथ्यों से
पिरलि्षत है िक िवप्षी सं० 2 ्षारा दुराशय के तहत उसके दो बेिटया व दो दामादों के
िवरू्ध वतर्मान पिरवाद योिजत िकया गया है। उपरो्व ्ऺश्नगत आदेश समुिचत िववेचना
एवं तथ्यों पर आधािरत नहीं है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश ्ऴुिटपूणर् है एवं अपास्त िकए
जाने योग्य है।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने कथन िकया िक ्ऺश्नगत आदेश में कोई िविधक
अथवा ्षे्ऴािधकार संबंधी ्ऴुिट पिरलि्षत नहीं हो रही है। ्ऺश्नगत आदेश को अपास्त
करने हेतु जो तकर् ्ऺस्तुत िकए गए वे आधारहीन है, क्योंिक वतर्मान आवेदन अपिरपक्व
स्ऴ पर है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश में हस्त्षेप िकए जाने की कोई आवश्यकता ्ऺतीत
नहीं हो रही है।
5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को ्शवणोपरांत एवं प्ऴावली व ्ऺश्नगत
आदेशों का सम्यक रूपेण पिरशीलन िकया तथा िव्षान अवर न्यायालय ्षारा पािरत
्ऺश्नगत आदेश समुिचत िववेचना पर आधािरत है, सकारण एवं उिचत आदेश है। उसमें
कोई सारवान अिनयिमतता, अनौिचत्यता या ्ऺि्वया या ्षे्ऴािधकार संबंधी ्ऴुिट
पिरलि्षत नहीं होती है। इसिलए, यह आवेदन प्ऴ को िनरस्त िकए जाने योग्य है।
6. तद्नुसार, आवेिदका की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के
अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाता है।
7. कायार्लय को िनदरॏश िदया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप संबंिधत अवर
न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनि्ात िकया जाय।
                                                                                         NA528 No. 17234 of 2026
                                                                  3


                                    8. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय।



                                                                                (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    May 5, 2026
                                    CP.sahani




Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad


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