Allahabad High Court
ARVIND KUMAR MISHRA AND ANOTHERversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that the allegations do not disclose any cognizable offence under the relevant IPC provisions, and therefore the discharge application under Section 528 BNNS must be dismissed.
Summary
The applicants filed an application under Section 528 of the BNNS seeking discharge of a criminal case (Criminal Appeal No. 842/2020) in which they were charged under IPC sections 323, 504, 506, 427 and 452. The trial court had earlier dismissed a discharge application filed on 03.12.2025, and the High Court was asked to consider whether the earlier order was valid and whether the applicants could be discharged. The court examined the statements of the complainant, the police report, and the testimonies of witnesses, finding that the complainant’s allegations were unsubstantiated and that no injury or property damage occurred. It held that, on the material before it, no cognizable offence under the cited IPC sections could be established, and therefore the discharge application could not be entertained at this stage. Consequently, the court dismissed the application, directing that the matter be listed for a hearing within one month and that a final disposal be made within two months if the discharge application is filed again.
Issues considered
- Whether the facts alleged by the complainant constitute an offence under IPC sections 323, 504, 506, 427 and 452.
- Whether the trial court erred in dismissing the discharge application filed under Section 528 of the BNNS.
- Whether the High Court can entertain a discharge application at the interlocutory stage without a full trial.
Legislation cited
- Code of Civil Procedure, 1908
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 145, 200, 202, 204, 245
- Indian Civil Procedure Code (BNNS) 2023 — s. 268, 528
- Indian Penal Code — s. 323, 427, 452, 504, 506
Subjects
- discharge application
- Section 528 BNNS
- IPC offences
- evidence evaluation
- interlocutory hearing
- criminal procedure
- court dismissal
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 19764 of 2026
Arvind Kumar Mishra And Another
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P. and Another
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Pawnesh Tiwari, Pramila Tiwari,
Somesh Tiwari
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 82
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन प्ऴ, पिरवाद
सं० 842 सन 2020 (राम अिभलाष बनाम अरिवन्द कुमार व अन्य), अन्तगर्त धारा 323,
504, 506, 427 भा०दं०िव०, थाना मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज में िवशेष मुख्य न्याियक
मिजस््िेट, ्ऺयागराज ्षारा पािरत एकप्षीय आदेश िद० 25.03.2026 को अपास्त करने हेतु
योिजत िकया गया है।
2. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा
प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक न्याियक मिजस््िेट ्ऺयागराज ्षारा
एकप्षीय आदेश िदनांक 25.03.2026 के ्षारा आवेदकगण की ओर से धारा 145(2) के
तहत उन्मोचन आवेदन को इस आधार पर खािरज कर िदया गया है िक जब मामले की सुनवाई
की गई तो आवेदक और उनके अिधव्वा उपिस्थत नहीं थे, जबिक आवेदक ्षारा आदेश फलक
पर हस्ता्षर बनाये गये है। यहां ्ऺासंिगक है िक अिभयोजन प्ष के कथनानुसार, संि्षप्त में,
मामला यह है िक िदनांक 06/08/2020 को शाम 5 बजे, आवेदक ने पिरवादी
(िशकायतकतार्) की तरफ का दरवाजा खोला और िवरोध करने पर उन्होंने पिरवादी के साथ
गाली-गलौज की तथा मारपीट की। पिरवादी के तकर् के अनुसार, उसने संबंिधत थाने की पुिलस
को सूिचत िकया था, परंतु उसकी ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् नहीं की गई, इसिलए उसने
आवश्यक कारर्वाई के िलए िदनांक 12.10.2020 को विर्ष पुिलस अधी्षक, ्ऺयागराज को
्ऺाथर्ना प्ऴ िदया। पिरवादी ने किथत घटना के 2 महीने बाद, िदनांक 21.10.2020 को िवशेष
मुख्य न्याियक मिजस््िेट, इलाहाबाद के सम्ष धारा 323, 504, 506, 452, 427
आई.पी.सी., थाना मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज के अंतगर्त वषर् 2026 का पिरवाद प्ऴ ्ऺस्तुत
कर दािखल िकया। पिरवादी ने िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट इलाहाबाद के न्यायालय के
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सम्ष िदनांक 13.01.2021 को धारा 200 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत अपना बयान दजर्
कराया। धारा 200 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् बयान के अवलोकन से यह पूरी तरह से
स्प्ि हो जाएगा िक दोनों प्षों के बीच आबादी की भूिम के संबंध में एक दीवानी िववाद चल
रहा है। उ्व बयान के अवलोकन से यह भी स्प्ि है िक आवेदकों के िवरु्ध उपयुर््व उल्लेिखत
धाराओं तहत कोई भी ्ऺथम दृ्िया मामला नहीं बनता है। आगे यह भी कहा गया िक पिरवादी
की पत्नी, गवाहों में से एक उषा िम्शा का बयान िदनांक 25.02.2021 को धारा 202 दंड
्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् िकया गया है। उ्व गवाह के बयान के अवलोकन से यह पूरी तरह
स्प्ि है िक उसने पिरवाद के िवपरीत िवरोधाभासी बयान िदया है। एक अन्य गवाह शारदा
्ऺसाद ितवारी, जो दूसरे िजले यानी िजला ्ऺतापग़ा का िनवासी है, का बयान िदनांक
03.02.2021 को धारा 202 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् िकया गया है। चूंिक यह गवाह
दूसरे िजले का िनवासी और पिरवादी का िरश्तेदार है, इसिलए उसका साष्य िव्षसनीय नहीं
है। िरकॉडर् पर उपलब्ध साम्षी पर िवचार िकए िबना, िव्षान मिजस््िेट ने धारा 204 दंड ्ऺि्वया
संिहता के तहत आदेश िदनांक 08.09.2021 पािरत िकया और आवेदकों को धारा 323,
504, 506, 427 आई.पी.सी. के तहत तलब िकया। पिरवाद के साथ पिरवादी ने कोई भी
िचिकत्सकीय िरपोटर् ्ऺस्तुत नहीं की है, िजससे यह िस्ध हो सके िक उसे वैसी चोटें आई थीं
जैसी पिरवाद में आरोप लगाया गया है। वास्तव में, न तो पिरवाद में लगाए गए आरोपों के
अनुसार कोई घटना घटी और न ही उसे या उसके पिरवार के िकसी भी सदस्य को कोई चोट
आई। समिनग आदेश के अवलोकन से यह पूरी तरह स्प्ि है िक धारा 452 आई.पी.सी. के
तहत कोई अपराध नहीं बनता है और तदनुसार आवेदकों को धारा 452 आई.पी.सी. के तहत
तलब नहीं िकया गया है। आरोप के अनुसार, चोट घर के भीतर पहुंचाई गई है और इलेक््िॉिनक
सामान को उसके अंदर तोड़ा गया है। यिद यह पाया जाता है िक आवेदकों ने घर में ्ऺवेश नहीं
िकया, तो पिरवादी का आरोप पूरी तरह झूठा सािबत होता है। उल्लेखनीय है िक आवेदकगण ने
िव्षान िवचारण अदालत के सम्ष पिरवाद वाद संख्या 842/2020 (राम अिभलाष बनाम
अरिवद कुमार एवं अन्य), अंतगर्त धारा 323, 504, 506, 427 आई.पी.सी., थाना
मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज में अपने अिधव्वा के माध्यम से धारा 145(2) दंड ्ऺि्वया
संिहता के तहत िदनांक 03.12.2025 को िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट के न्यायालय के
सम्ष एक उन्मोचन आवेदन (discharge application) ्ऺस्तुत िकया था। धारा 245(2)
दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत िदए गए आवेदन पर कोई िनणर्य नहीं िलया गया और कोई आदेश
पािरत नहीं िकया गया। आवेदक ने भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता, 2023 की धारा 528 के
तहत आवेदन संख्या 50989/2025 दायर करते हुए इस माननीय न्यायालय की शरण ली।
भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता, 2023 की धारा 268 के तहत आवेदकों को यह वैधािनक
उपचार ्ऺाप्त है िक यिद कोई मामला नहीं बनता है, तो उन्हें िकसी भी पूवर्वतर् चरण में
उन्मोिचत िकया जा सकता है। उपरो्व आवेदन संख्या 50979/2025 पर िवचार करते हुए,
माननीय न्यायालय ने िदनांक 19.12.2025 को आदेश पािरत करने की कृपा की,
िजसमें िवचारण न्यायालय को आवेदक ्षारा ्ऺस्तुत उन्मोचन आवेदन पर उिचत आदेश पािरत
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करने का िनदरॏश िदया गया था। आवेदक ने िदनांक 19.12.2025 के आदेश को िदनांक
13.02.2026 को िवचारण न्यायालय के सम्ष इस ्ऺाथर्ना के साथ ्ऺस्तुत िकया िक आदेश
िदनांक 19.12.2025 के अनुपालन में आवेदक के उन्मोचन आवेदन का िनस्तारण िकया
जाए। उपरो्व आदेश िदनांक 19.12.2025 के अनुपालन में, िवचारण न्यायालय ने आदेश
िदनांक 25.02.2026 पािरत करने की कृपा की, िजसमें पिरवादी को उन्मोचन आवेदन पर
अपनी आपि्त दजर् करने का िनदरॏश देते हुए अगली ितिथया िनयत की गई तथा बाद में आवेदक
अनुपिस्थित में ्ऺश्नगत आदेश पािरत कर िदया गया। इससे पिरलि्षत है िक संबंिधत िवचारण
न्यायालय ्षारा पािरत ्ऺश्नगत आदेश सकारण एवं िविध सम्मत नहीं हैं, आवेदक के िवरू्ध
उपरो्व धाराओं का कोई अपराध नहीं बनता है। उनका यह भी कथन है िक वह िवचारण
न्यायालय में उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ दािखल करने की अनुमित चाहते हैं तथा उनके ्षारा दािखल
िकए गए उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ का िनस्तारण करने को संबंिधत िवचारण न्यायालय को िनदरॏश
िदया जाय।
4. िव्षान अिधव्वा अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा के तकॏल
का ्ऺबल िवरोध िकया गया ।
5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुनने एवं प्ऴावली पर उपलब्ध अिभलेखों
के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है िक उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ के िखलाफ
उपरो्व धाराओं के अन्तगर्त कोई अपराध गिठत नहीं होता है। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ की ओर से
जो तकर् ्ऺस्तुत िकए गए हैं वे िववािदत तािथ्यक ्ऺश्न से संबंिधत हैं, िजनके िवषय में इस
न्यायालय ्षारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के आवेदन प्ऴ पर कोई फैसला देना संभव नहीं है,
चूंिक उ्व तािथ्यक ्ऺश्नों का िविन्ाय िवचारण न्यायालय ्षारा ही साष्य आने के बाद िकया
जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय ्षारा R.P. Kapur Vs. State of
Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992
SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192
and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq
and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में िदए गए िनणर्यों में यह
अवधािरत िकया गया है िक इस स्तर पर केवल ्ऺथम दृ्िया ही केस देखा जाना है। मुिल्जमान
का जो िववािदत बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर िवचार नहीं िकया जा सकता है।
6. हालांिक, यह आवेदन इस समुि्व के साथ िनस्तािरत िकया जाता है िक, यिद आवेदकगण
्षारा संबंिधत िवचारण न्यायालय के सम्ष 01 माह के अंदर उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ दािखल
िकया जाता है तो संबंिधत िवचारण न्यायालय ्षारा उभय प्ष को सुनवाई का सम्यक अवसर
्ऺदान करते हुए उभय प्ष को सुनकर, उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ का िनस्तारण उपलब्ध साष्य के
आधार पर यथासंभव 02 माह में करना सुिनि्ात करेंगे।
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7. उ्व िनदरॏशों के साथ यह ्ऺाथर्ना प्ऴ अिन्तम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
May 14, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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