Allahabad High Court
AABHASHIversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that the existence of a prima facie case precludes the quashing of the proceedings under Section 528 CrPC.
Summary
The applicant filed an application under Section 528 of the Criminal Procedure Code seeking to quash the criminal proceedings (Case No. 459/2026) pending under the POCSO Act. The applicant's counsel argued that no offence was made out and the prosecution was malicious, citing lack of independent witnesses and the alleged victim's adult status. The respondent's counsel contended that a charge sheet had been filed and the trial court had validly issued orders. The High Court examined the factual disputes and held that a prima facie case existed, referencing Supreme Court precedents that a quash order cannot be granted at this stage. Consequently, the application for quashing was rejected and the proceedings were allowed to continue.
Issues considered
- Whether the application under Section 528 CrPC for quashing of proceedings is maintainable when a prima facie case exists
- Whether the allegations constitute an offence under Section 528 IPC and the POCSO Act
- Whether the court can pass a quash order at the preliminary stage of the trial
Legislation cited
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 115(2), 351(3)
- Indian Penal Code — s. 528
- Protection of Children from Sexual Offences Act — s. 11, 12, 5L, 6
Subjects
- Section 528 CrPC
- quash petition
- prima facie case
- POCSO Act
- criminal procedure
- application dismissed
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 36545 of 2026
Aabhashi
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P. and Another
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Ashok Kumar Singh Bais
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आवेदन
पत्र, मु०अ०सं० 540/2025, अंतर्गत धारा 351(3), 115(2) भारतीय न्याय संहिता व
धारा 11/12 व 5एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना बेहट, जिला सहारनपुर में प्रेषित आरोप पतर,
दिनांकित 15.01.2026 से उदभूत सत्र वाद सं० 459/2026 (State Vs. Aabhashi
and others), जो विशेष न्यायाधीश, पाक्सो एक्ट/ए.डी.जे. कोर्ट सं० 13, सहारनपुर के
न्यायालय में लंबित है, में पारित तलबी आदेश दि० 26.02.2026 तथा इस वाद की संपर्ण
ू
कार्यवाही को निरस्त करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के स्थान पर उनकी सहयोगी विद्वान अधिवक्ता सुश्री आमना
अंसारी एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता
है और वर्तमान अभियोजन दुर्भावनापूर्ण इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संस्थित किया
गया है। यहां प्रासंगिक है कि कथित घटना कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। कथित पीड़िता के आयु
परीक्षण प्रपत्र के अनुसार वह बालिग है तथा कथित पीड़िता द्वारा अपने आंतरिक चिकित्सकीय
परीक्षण कराने से इंकार किया गया है। इससे अभियोजन कथानक की संदिग्धता परिलक्षित हो
रही है। पुनः उनके द्वारा अपने तर्क के समर्थन में कुछ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान
आकर्षित किया।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के
उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है तथा उस पर संबंधित विचारण
न्यायालय द्वारा पर्याप्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है तथा अभियुक्त के विद्वान
अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उठाए गए तर्क में तथ्यात्मक विवाद का
न्यायिक निर्णय (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शामिल है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों एवं अभिलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से
और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक के
विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष किए गए सभी अभिवचन (
submissions)
NA528 No. 36545 of 2026
2
तथ्य के विवादित प्रश्नों से संबंधित हैं, जिनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस.
के अंतर्गत न्यायिक निर्णय नहीं किया जा सकता है। इस चरण पर केवल प्रथम दृष्टया (prima
facie) मामला देखा जाना है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम
पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल,
1992 एससीसी (क्रिमिनल) 426, बिहार राज्य बनाम पी.पी. शर्मा, 1992 एससीसी
(क्रिमिनल) 192 और अंत में झंडू फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड बनाम मोहम्मद शराफुल
हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (क्रिमिनल) 283 के मामलों में प्रतिपादित कानून
के आलोक में स्पष्ट किया गया है। इसलिए, इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने
की प्रार्थना को अस्वीकार किया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।
8. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर
न्यायालय को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।
9. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
October 1, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
Checking your session…