Allahabad High Court
HAFIZ MOHAMMAD NIZAMUDDINversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The application under Section 528 is dismissed because the matter requires a prima facie evaluation of facts and evidence, which cannot be decided at this stage.
Summary
The applicant, Hafiz Mohammad Nizamuddin, filed an application under Section 528 of the Indian Security Code seeking the dismissal of criminal proceedings (State Vs. Mohd. Siddiq & others) pending under IPC Section 120B and the Uttar Pradesh Prevention of Conversion of Religion Act. He alleged that the prosecution was malicious, lacking any substantive offence, and that the evidence, including a marriage certificate copy, was insufficient. The respondent argued that a charge sheet had been filed and the trial court had validly proceeded on the basis of available evidence. The High Court examined the submissions and held that the factual disputes required a prima facie assessment and could not be resolved under Section 528 at this stage. Consequently, the Court rejected the applicant’s prayer and dismissed the application, directing the order to be communicated to the lower court.
Issues considered
- What is the appropriate jurisdiction of a Section 528 application when factual disputes and evidentiary assessment are pending?
- Whether the prosecution against the applicant is malicious and lacks a prima facie case under IPC Section 120B and the Uttar Pradesh Prevention of Conversion of Religion Act.
Legislation cited
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 161, 164
- Indian Penal Code — s. 120B
- Indian Security Code — s. 528
- Uttar Pradesh Prevention of Conversion of Religion Act — s. 3/5(1)
Subjects
- Section 528
- malicious prosecution
- prima facie
- evidentiary assessment
- conversion law
- IPC 120B
- U.P. Conversion Act
- dismissal
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 42450 of 2026
Hafiz Mohammad Nizamuddin
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P. and Another
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Jitendra Singh, Sonam Singh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं०
0692/2021, अंतर्गत धारा 120बी भारतीय दण्ड संहिता व धारा 3/5(1) उ०प्र० विधि विरूदध
धर्म परिवर्तन, थाना कोतवाली, जिला फतेहपुर में प्रेषित आरोप पत्र, दिनांकित 05.01.2023 से
उद्भूत वाद सं० 8732/2024 (State Vs. Mohd. Siddiq & others) के न्यायालय में लंबित
है, में पारित आदेश दि० 05.01.2023 तथा इस वाद की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने
हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का
परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है
और वर्तमान अभियोजन दुर्भावनापूर्ण इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संस्थित किया गया है।
यहां प्रासंगिक है कि संबंधित विवेचक द्वारा पूरी विवेचना के दौरान दिनांक 22.01.2011 के
निकाहनामे की ज़ेरॉक्स (छायाप्रति) के आधार पर कोई भी मूल निकाहनामे का दस्तावेज़
उपलब्ध नहीं कराया गया है, और विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, फतेहपुर द्वारा उत्तर प्रदेश
विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) एवं 120-बी के तहत आवेदक
के विरुद्ध संज्ञान ले लिया गया है। आवेदक द्वारा संबंधित विवेचक द्वारा उस पर लगाए गए
अपराध को कारित नहीं किया गया है, किंतु कुछ स्थानीय हिंदू संगठन आवेदक से नाराज थे
और वे आवेदक के खिलाफ किसी एक सुराग की तलाश में थे, अंततः वे अपने उद्देश्य में सफल
रहे और वर्तमान अभियोजन में आवेदक को झूठा फंसा दिया गया है। सूचनाकर्ता/पीड़िता द्वारा
अपने धारा 161 दं०प्र०सं० एवं दिनांक 21.10.2021 को विद्वान अपर मुख्य न्यायिक
मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-2, फतेहपुर के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के अंतर्गत
अपने बयान के दौरान भी आवेदक का नाम उजागर नहीं किया गया है। इससे परिलक्षित हो रहा
है कि आवेदक की इस मामलें में कोई भूमिका नहीं है। पुनः उनके द्वारा अपने तर्क के समर्थन में
कुछ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के
उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है तथा उस पर संबंधित विचारण
न्यायालय द्वारा पर्याप्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है तथा अभियुक्त के विद्वान
अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है।
NA528 No. 42450 of 2026
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5. इस चरण पर, आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उठाए गए तर्क में तथ्यात्मक विवाद का
न्यायिक निर्णय (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शामिल है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों एवं अभिलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और
इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक के विरुद्ध कोई
अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष किए गए सभी अभिवचन (submissions)
तथ्य के विवादित प्रश्नों से संबंधित हैं, जिनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के
अंतर्गत न्यायिक निर्णय नहीं किया जा सकता है। इस चरण पर केवल प्रथम दृष्टया (prima
facie) मामला देखा जाना है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम
पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992
एससीसी (क्रिमिनल) 426, बिहार राज्य बनाम पी.पी. शर्मा, 1992 एससीसी (क्रिमिनल)
192 और अंत में झंडू फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड बनाम मोहम्मद शराफुल हक एवं अन्य
(पैरा-10) 2005 एससीसी (क्रिमिनल) 283 के मामलों में प्रतिपादित कानून के आलोक में स्पष्ट
किया गया है। इसलिए, इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की प्रार्थना को
अस्वीकार किया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।
8. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर न्यायालय
को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।
9. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
October 1, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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