Allahabad High Court
SURENDRAversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The High Court held that the lower court’s order rejecting the release of the seized motorcycle was erroneous and must be set aside.
Summary
Surendra filed an application under Section 528 of the BNSS Act seeking to set aside an order dated 04‑07‑2026 passed by the Additional Sessions Judge, Court No. 3, Baradari, Bareilly, which had rejected his request to release a seized Pulsar motorcycle (UP25EE7473) and 528 g of opium. He alleged that the recovery memo prepared at the time of FIR registration was false and that the vehicle, still held in police lock‑up, was deteriorating and should not be retained indefinitely. The State argued that the seized items could be proceeds of drug trafficking, but did not rebut the claim that prolonged storage served no public or judicial interest. The Court examined the material and noted the lack of direct evidence that the motorcycle was the subject‑matter of any offence, and relied on the Supreme Court’s decision in Sundarbhai Ambalal Desai, which mandates timely disposal of seized property. Consequently, the High Court set aside the lower court’s order, granting Surendra liberty to file a fresh application with supporting ownership documents within one month for the vehicle’s disposal.
Issues considered
- What is the appropriate procedure for the disposal of seized motor vehicles under Section 528 of the BNSS Act?
- Whether the lower court erred in rejecting the release application without considering the Supreme Court’s guidelines in Sundarbhai Ambalal Desai?
- Whether the continued retention of the seized motorcycle violates principles of public and judicial interest.
Legislation cited
- Bihar Narcotic Substances (BNSS) Act — s. 528
- Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 — s. 18, 29, 8
Subjects
- seizure
- property disposal
- NDPS Act
- section 528
- set‑aside
- motor vehicle
- drug trafficking
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 42501 of 2026
Surendra
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Rajesh Kumar Verma
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 361
सन 2026, अन्तर्गत धारा 8/18/29 एन.डी.पी,.एस. एक्ट, थाना बारादरी, जिला बरेली से उद्भूत
विविध वाद सं० 451/2026 (State Vs. Surendra) में अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट सं० 3,
बरेली द्वारा पारित आदेश दि० 04.07.2026 को अभिखण्डित करन हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं राज्य की ओर से विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना
एवं पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट के पंजीकरण के समय विवेचना
अधिकारी द्वारा एक झूठा बरामदगी ज्ञापन (रिकवरी मेमो) तैयार किया गया, जिसमें आवेदक की
निशानदेही/कब्जे से 528 ग्राम अफीम और एक पल्सर मोटरसाइकिल की बरामदगी दिखाया जाना
दर्शाया गया है। एफ.आई.आर. के पंजीकरण के पश्चात आवेदक को जेल भेज दिया गया और
जमानत पर रिहा होने के पश्चात, आवेदक द्वारा पल्सर मोटरसाइकिल संख्या UP25EE7473 को
रिलीज (मुक्त) कराने हेतु अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-3, बरेली के समक्ष दिनांक
05.06.2026 को शपथ पत्र के साथ एक रिलीज प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसके तथ्यों
और परिस्थितियों पर विचार किए बिना तथा कानून के प्रावधानों के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय
द्वारा सुंदरभाई अंबालाल देसाई (सुप्रा) के ऐतिहासिक निर्णय में प्रतिपादित विधि की अवहेलना
करते हुए, अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-3, बरेली द्वारा अपने दिनांक 04.07.2026 के
आदेश के माध्यम से आवेदक के रिलीज प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया है। इसलिए,
प्रश्नगत आदेश अपास्त किये जाने योग्य है।
4. इसके विपरीत, विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने आक्षेपित आदेश का समर्थन करते हुए तर्क
दिया कि बरामद वस्तुएं अवैध मादक पदार्थों के व्यापार से अर्जित हो सकती हैं, किंतु उनके द्वारा
इसका खंडन नहीं किया जा सका कि वाहन को अनिश्चित काल तक थाने में खड़े रहने देने से
NA528 No. 42501 of 2026
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उसकी स्थिति खराब हो जाएगी और वह पूर्णतः कबाड़ हो जाएगा, जिससे किसी भी पक्ष का कोई
हित नहीं सधता है।
5. उभय पक्षकारों के तर्कों एवं अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री के अनुशीलन से यह स्पष्ट है
कि प्रश्नगत पल्सर मोटरसाइकिल संख्या UP25EE7473 अभियुक्त/आवेदक से बरामद की गई
थीं, किंतु ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य वर्तमान चरण में प्रस्तुत नहीं किया गया है जो यह सिद्ध करे कि
यह वाहन किसी अपराध की विषय-वस्तु (subject matter) हैं या इनके थाने/मालखाने में बने
रहने से मुकदमे के विचारण पर कोई अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। यहां प्रासंगिक है कि माननीय उच्चतम
न्यायालय ने सुंदरभाई अंबालाल देसाई (सुप्रा) के ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट रूप से यह
निर्धारित किया है कि ज़ब्त की गई संपत्ति/वस्तुओं को अनावश्यक रूप से मालखाने या थाने में
वर्षों तक रोके रखना जनहित एवं न्यायहित में नहीं है। न्यायालयों को ऐसी वस्तुओं की उचित
फोटो/पंचनामा तैयार कराकर तथा उपयुक्त मुचलके/प्रतिभूति पर उनके वास्तविक स्वामी को
अवमुक्त/निर्मुक्त कर देना चाहिए। उपर्युक्त तथ्यों, परिस्थितियों एवं विधि व्यवस्था के आलोक में,
यह आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है तथा अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट सं० 3,
बरेली द्वारा पारित आदेश दि० 04.07.2026 अपास्त (Set-aside) किया जाता है।
8. तदनुसार, आवेदक को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वह संबंधित विचारण न्यायालय के समक्ष
प्रश्नगत वाहन का स्वामित्व दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ एक उचित आवेदन
दायर करे। यदि, ऐसा आवेदन आज से एक महीने के भीतर दायर किया जाता है, तो संबंधित
विचारण न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि आवेदक के आवेदन (जमातलाशी से बरामद
प्रश्नगत वाह का माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सुंदरभाई अंबालाल देसाई (सुप्रा) के
ऐतिहासिक निर्णय में अभिनिर्धारित विधि-व्यवस्था के आलोक में यथासंभव शीघ्रता से,
अधिमानतः उसके बाद 01 माह की अवधि के भीतर उसका नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा।
9. तदनुसार, यह आवेदन पत्र अंतिम रूप से निस्तारित किया जाता है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
October 1, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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