Allahabad High Court
SMT. MAMTA DEVIversusSTATE OF U.P. AND 4 OTHERS
- Decided
Holding
The Court set aside the appellate authority’s order and remitted the matter for fresh consideration, finding the second inquiry premature, the card‑holder statements unreliable, and procedural requirements breached.
Summary
The petitioner, a fair‑price shop licensee, had her licence cancelled after a series of inspections that alleged irregularities in the distribution of food grains, including shortfalls in stock and complaints by ration card‑holders. The first inspection led to a suspension order, which the petitioner successfully contested, but a second inspection was conducted only six weeks later on similar allegations and again found stock shortages, leading to a cancellation order. The petitioner appealed, arguing that the second inquiry was premature, that many card‑holder statements were later retracted, and that the verification of her explanation by a lower‑ranking officer violated the procedural requirement that a higher‑ranking officer should review such explanations. The appellate authority dismissed the appeal, holding that the investigations were proper. The High Court, however, found that the short interval between inquiries, the unreliable statements, and the procedural lapses warranted reconsideration and set aside the appellate order, remitting the matter for a fresh decision. The writ petition was disposed with directions to amend the appeal within three weeks and for the appellate authority to decide afresh within six months.
Issues considered
- Whether a second inquiry and suspension of a fair‑price shop licence within six weeks of a prior inquiry on similar allegations is justified.
- Whether statements recorded from ration card‑holders during inspection can be relied upon when later retracted.
- Whether the verification of the licencee’s explanation by a subordinate officer complies with the procedural requirement under G.O. 05.08.2019.
- Whether the appellate authority’s dismissal of the appeal was legally valid.
Legislation cited
- Essential Commodities Act, 1955 — s. 3, 7
Subjects
- fair price shop
- license cancellation
- essential commodities
- stock shortage
- administrative procedure
- appeal
- inspection
- procedural fairness
Judgment
2026:AHC:206029
Reserved : 28/09/2026
Delivered : 01/10/2026
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
WRIT - C No. - 12615 of 2025
Smt. Mamta Devi
…..Petitioner(s)
Versus
State of U.P. and 4 others
…..Respondent(s)
Counsel for Petitioner(s) : Indu Shekhar Tripathi
Counsel for Respondent(s) : Avinash Chandra Srivastava, C.S.C.
Court No. - 36
HON'BLE SAURABH SHYAM SHAMSHERY, J.
1. The petitioner is a fair price shop licensee and she is aggrieved
that her license was cancelled and an appeal filed against the same was
dismissed.
2. An inquiry was earlier initiated on basis of certain alleged
irregularities in distribution of food-grains, however, on basis of
explanation provided by the petitioner, it was recommended by SDM
concerned vide an order dated 03.02.2023 to restore the license.
3. Further case was that within a period of six weeks, again on basis
of a fresh complaint on alleged similar nature of irregularities, a fresh
inspection was conducted and on basis of statements of 53 cardholders
that there were various irregularities, a recommendation of suspension
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was forwarded by Supply Inspector vide a communication dated
20.04.2023, wherein following irregularities were pointed out :-
“विक्रे ता को निम्नवत आरोपों से आरोपित किया जाता है :-
विक्रे ता द्वारा कार्डधारकों को उनके राशनकार्ड में दर्ज यूनिट के सापेक्ष कम राशन दिया
जाता है अर्थात घटतौली की जाती है।
विक्रे ता द्वारा कार्डधारकों को बाल्टी से तौलकर खाद्यान्न दिया जाता है।
विक्रे ता द्वारा कार्डधारकों से ई-पास मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है बाद में राशन
देने हेतु कहा जाता है किन्तु दिया नहीं जाता है।
कार्डधारकों द्वारा कम खाद्यान्न की शिकायत करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया
जाता है।
दुकान का संचालन मनमाने तरीके से विक्रे ता के पति द्वारा किया जा जाता है।”
4. Subsequently, another inspection was conducted on 25.04.2023 in
presence of petitioner. The stock register was not found up to date. On
inspection of stock available with shop and comparing with details
available with department, 3.97 quintal of wheat and 15.59 quintal of
rice was found less. Accordingly, vide an order dated 01.05.2023 passed
by SDM concerned, license was put under suspension and petitioner was
asked to submit reply/explanation to aforesaid shortage as well as
alleged irregularities. An FIR was also lodged against petitioner u/s 3/7
of Essential Commodities Act.
5. The petitioner thereafter submitted a representation that a fresh
inspection be conducted since there was no shortage of stock and same
was available in another room within same premises which was not
earlier inspected. On basis of above request, an inspection was again
conducted by Regional Food Officer on 05.06.2023. Stock register was
again not found up to date and 30 sacks of rice, 8 sacks of wheat and 35
kg open rice were found in other room. It is to be noted that first
inspection was conducted on 25.04.2023 and subsequent inspection was
conducted on 05.06.2023 i.e. after six weeks.
6. The petitioner has submitted explanation to charges on 28.06.2023
that some of cardholders have recorded their statements subsequently
taking a u-turn to the allegations made during inspection as well as on
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subsequent inspection, since stock was found to be correct, therefore,
there would be no irregularity.
7. After considering above referred reply and material on record, the
SDM concerned vide an order dated 20.09.2023 cancelled the license.
For reference, relevant part of same are quoted below :-
“विक्रे ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण का परिशीलन निलम्बन आदेश के सापेक्ष करने हेतु
कार्यालय पत्र सं० 534 दिनांक 02.08.2023 के द्वारा निर्देशित किया गया। नायब
तहसीलदार अपनी आख्या दिनांक 29.08.2023 को प्रस्तुत की गयी। नायब तहसीलदार
की आख्यानुसार संलग्न रिपोर्ट के अनुसार पूर्ति निरीक्षक सिरसागंज की जाँच में ग्राम
पंचायत गुरै या सोयलपुर के कु ल 53 कार्डधारकों के बयान दर्ज किये गये जिसमें से 13
राशनकार्डधारकों द्वारा अपने बयान में अगवत कराया गया कि उचित दर विक्रे ती श्रीमती
ममता देवी द्वारा अंगूठे लगवाने के बाद खाद्यान्न नहीं दिया जाता है। तथा 40 कार्डधारकों
द्वारा बाल्टी से तौलकर व कम राशन देने व अभद्र व्यवहार के सम्बन्ध में बयान दिये है तथा
जाँच में कौके पर दुकान पर 3.97 कु न्तल गेहूँ व 15.09 कु न्तल चावल कम पाया गया है।
उक्त शिकायत के कम में उचित दर विक्रे ता द्वारा अपना लिखित स्पष्टीकरण उप
जिलाधिकारी महोदय को प्रस्तुत किया गया। जिसमें 16 राशनकार्डधारकों के बयान संलग्न
किये गये। जिसमें उक्त 16 राशनकार्डधाराकें / उनके पति/पत्नी द्वारा बयान दिया गया है
कि उन्हें ममता देवी उचित दर विक्रे ती से यूनिट के हिसाब से पूरा खाद्यान्न मिलता है तथा
जॉच टीम के समक्ष किसी के बहकावे में आकर गलत बयान दे दिये थे। तथा 28
राशनकार्डधारक जिनमे द्वारा कम खाद्यान्नं दिये जाने सम्बन्धी बयान दिये थे , विक्रे ता द्वारा
उनको पूरा खाद्यान्न आधार प्रमाणीकरण के उपरान्त दिये जाने सम्बन्धी बयान दिये थे,
विक्रे ती द्वारा उनको पूरा खाद्यान्न आधार प्रमाणीकरण के उपरान्त दिये जाने के सम्बन्ध में
बिकी रजिस्टर की छायाप्रति संलग्न की है जिस पर उनके हस्ताक्षर / अंगूठा निशानी अंकित
है परन्तु इस सम्बन्ध में राशनकार्डधारकों के बयान संलग्न नहीं है। कार्डधारक राममूर्ति तथा
अर्चना देवी का नाम पात्रगृहस्थी की सूची में शामिल नहीं है। विक्रे ता द्वारा अपने स्पष्टीकरण
में अवगत कराया गया कि 1 राशनकार्डधारक संख्या 2147202040508 गीता देवी के
पति का जॉच रिपोर्ट में बयान अंकित है जबकि इनके पति जगमोहन की पूर्व में मृत्यु हो चुकी
है, तथा एक राशनकार्ड सं0 214740840166 पर कार्डधारक के परिवार से बाहर किसी
दूसरे व्यक्ति द्वारा राशन न दिये जाने के सम्बन्ध में बयान दर्ज कराया है। 05 कार्डधारकों
प्रीती देवी कार्ड सं0 214740872777, शकु न्तला मिश्रा कार्ड सं0 21474084115,
मंजू देवी कार्ड सं0 214740843032, शिवानी कार्ड सं0 214740502679, कमला
देवी कार्ड सं० 214740790431 द्वारा विक्रे ती के यहाँ से कई माह से राशन प्राप्त नहीं
किया है। बल्कि किसी अन्य जगह से पोर्टबिलीटी के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। इस
सम्बन्ध में बिकी, रजिस्टर की छायाप्रति संलग्न की है।
मौके पर खाद्यान्न कम पाये जाने के सम्बन्ध में विके ती द्वारा अपने स्पष्टीकरण में अवगत
कराया गयाकि जाँच के समय दुकान के बराबर वाले कमरे में रखे हुए खाद्यान्न की गणना
पूर्ति निरीक्षक द्वारा यह कहकर नहीं की गयी कि वह खाद्यान्न दुकान की चौहद्दी में नहीं रखा
है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि विके ती द्वारा स्टाक रजिस्टर को अद्यतन न करने का कारण तथा
खाद्यान्न को दुकान जिस चौहद्दी / कमरे में संचालित है उसमें न रखकर बगल के कमने में
रखने का कोई वाजिव कारण अपने स्पष्टीकरण में उल्लिखित नहीं किया है। उचित दर
विके ती ममता देवी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक प्रतीत नहीं होता है।
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विक्रे ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण व निलम्बन आदेश व नायब तहसीलदार की रिपोर्ट का
अवलोकन किया गया जिसके अनुसार विक्रे ता द्वारा 28 राशनकार्डधारकों के खाद्यान्न
वितरण के सम्बन्ध में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है , जिससे यह सिद्ध हो सके
विक्रे ता द्वारा उन्हें सही मात्रा में खाद्यान्न निर्गत किया गया है। इसके अतिरिक्त विक्रे ता द्वारा
खाद्यान्न कम मिलने के सम्बन्ध में मात्र स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया है कि जाँच के
समय दुकान के बराबर वाले कमरे में रखे हुए खाद्यान्न की गणना पूर्ति निरीक्षक द्वारा यह
कहकर नहीं की गयी कि वह खाद्यान्न दुकान की चौहद्दी में नहीं रखा है जबकि जॉच के दौरान
विक्रे ता के यहाँ पाये गये खाद्यान्न की गणना की गयी थी तथा मौके पर ही निरीक्षण टिप्पणी
पर हस्ताक्षर कराये गये थे। विक्रे ता द्वारा जाँच के उपरान्त कहीं से खाद्यान्न लाकर रख लिया
गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विक्रे ता द्वारा खाद्यान्न वितरण में गम्भीर अनियमितता
बरती गयी है तथा 3.97 कु न्तल गेहूँ व 15.59 कु ० चावल की कालाबाजारी की गयी है।
विक्रे ता की उचित दर दुकान का निलम्बित अनुबन्ध पत्र आगे बनाये रखने का कोई औचित्य
नहीं है।
अतः उचित दर विक्रे ता श्रीमती ममता देवी, ग्राम पंचायत गौरे या सोयलपुर वि०ख० अरॉव
तहसील सिरसागंज की उचित दर दुकान का निलम्बित अनुबन्ध पत्र उनकी जमा समस्त
प्रतिभूति धनराशि शासन के पक्ष में जब्त कर निरस्त किये जाने हेतु पत्रावली ज़िलाधिकारी
महोदय के समक्ष प्रस्तुत की गयी। जिलाधिकारी महोदय के अनुमोदन दिनांक
16.09.2023 के अनुपालन में उचित दर विके ता श्रीमती ममता देवी, ग्राम पंचायत गौरे या
सोयलपुर वि०ख० अरॉव तहसील सिरसागंज की उचित दर दुकान का निलम्बित अनुबन्ध
पत्र उनकी जमा समस्त प्रतिभूति धनराशि शासन के पक्ष में जब्त करते हुए निरस्त किया
जाता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।”
8. Aforesaid order was challenged by way of filing an appeal,
however, same was dismissed vide an order dated 27.01.2025 and
relevant part thereof is quoted below :-
“अपीलकर्ता की ओर से उसके विद्वान अधिवक्ता द्वारा तथा राज्य सरकार की ओर से विद्वान
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता(फौजदारी), मण्डलायुक्त न्यायालय द्वारा दाखिल
लिखित बहस में प्रस्तुत तर्कों तथा अपील पत्रावली व अवर न्यायालय की पत्रावली पर
उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। साक्ष्यों के अवलोकन से स्पष्ट है
कि श्री आशीष मिश्रा, प्रधान, ग्राम पंचायत गुरै या सोयलपुर, वि०ख० अराँव, तहसील
सिरसागंज व जिला फिरोजाबाद द्वारा अपीलकर्ता के विरूद्ध कार्डधारकों से घटतौली,
निर्धारित रे ट से अधिक पैसा लेना, अंगूठा लगाने के बाद खाद्यान्न न देना, अभद्र व्यवहार
करने, विक्रे ती के पति द्वारा मनमाने तरीके से दुकान का संचालन करने की शिकायत की
गयी। उक्त शिकायत की जांच हेतु पूर्ति निरीक्षक को निर्देशित किया गया। उक्त शिकायत
की स्थलीय जांच तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक द्वारा की गयी। जांच के दौरान मौके पर उपस्थित
53 राशन कार्डधारकों द्वारा अपीलकर्ता द्वारा कार्डधारकों को उनके राशनकार्ड में दर्ज यूनिट
के सापेक्ष कम राशन देने अर्थात् घटतौली किये जाने, खाद्यान्न बाल्टी से तौलकर देने, ई-
पॉस मशीन पर अंगूठा लगवा लेने के बाद में राशन देने के लिए कहने किन्तु बाद में खाद्यान्न
नहीं देने, शिकायत करने पर अभद्र व्यवहार करने, दुकान का संचालन मनमाने तरीके से
अपीलकर्ता के पति द्वारा किये जाने की शिकायत की गयी। उक्त अनियमितताओं के
दृष्टिगत अपीलकर्ता की उचित दर की दुकान का अनुबन्ध पत्र निलम्बित किये जाने की
संस्तुति सहित अपनी आख्या दिनांक 20.04.2023 जिलाधिकारी के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत
की गयी। जिस पर जिलाधिकारी द्वारा अभिलेखीय साक्ष्य सहित पत्रावली प्रस्तुत करने हेतु
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निर्देशित किया गया। जिसके क्रम में अपीलकर्ता की उचित दर दुकान का औचक निरीक्षण
किया गया। निरीक्षण के समय अपीलकर्ता दुकान पर उपस्थित मिली। दुकान पर आवश्यक
सूचनाओं का प्रदर्शन नहीं पाया गया। दुकान पर उपस्थित इलेक्ट्रोनिक कांटे का परीक्षण
किया गया, जो सही पाया गया। स्टॉक रजिस्टर अद्यतन नहीं पाया गया। स्टॉक का भौतिक
सत्यापन किया गया। अपीलकर्ता की दुकान पर पाये गये आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक का
मिलान अपीलकर्ता द्वारा पूर्व माहों में किये गये वितरण की ऑनलाईन रिपोर्ट से करने पर
दुकान पर गेहूँ 3.97 कु ० व चावल 15.59 कु ० कम पाया गया। प्रथम दृष्टया विक्रे ता द्वारा
खाद्यान्न की कालाबाजारी किया जाना स्पष्ट होने पर अपीलकर्ता के विरूद्ध आवश्यक वस्तु
अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अन्तर्गत थाना सिरसागंज में प्र०सू०रि०सं०-0285
दिनांक 28.04.2023 को पंजीकृ त कराया गया। अपीलकर्ता द्वारा बरती गयी
अनियमितताओं के दृष्टिगत जिलाधिकारी के अनुमोदन दिनांक 27.04.2023 के अनुपालन
में उसकी उचित दर की दुकान का अनुबन्ध पत्र आदेश दिनांक 01.05.2023 द्वारा
निलम्बित करते हुए अपीलकर्ता को साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण 15 दिनों के अन्दर प्रस्तुत
करने हेतु निर्देशित किया गया। अपीलकर्ता द्वारा अपने यहाँ रखे हुए खाद्यान्न के संबंध में
जिलाधिकारी व जिला पूर्ति अधिकारी को प्रार्थना पत्र प्रेषित किये गये। प्रार्थना पत्र की जाँच
क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा की गयी। जाँच में अपीलकर्ता की दुकान के बगल से 30 बोरी
चावल व 08 बोरी गेहूँ तथा एक बोरी लूज वजन लगभग 35 किग्रा० खुला चावल रखा हुआ
पाया गया। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा अपनी जाँच आख्या दिनांक 05.06.2024 प्रस्तुत
की गयी। स्पष्टीकरण प्राप्त न होने पर अनुस्मारक पत्र दिनांक 13.06.2023 प्रेषित किया
गया। अपीलकर्ता द्वारा अपना स्पष्टीकरण दिनांक 28.06.2023 को प्रस्तुत किया गया।
जिसका परीक्षण करने हेतु नायब तहसीलदार को पत्र दिनांक 02.08.2023 द्वारा निर्देशित
किया गया। नायब तहसीलदार द्वारा स्पष्टीकरण का परीक्षण कर अपनी आख्या दिनांक
28.08.2023 प्रस्तुत की गयी। अवर न्यायालय द्वारा अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण,
निलम्बन आदेश व नायब तहसीलदार की परीक्षण आख्या का परिशीलनध्अवलोकन किया
गया। जिसमें पाया गया कि अपीलकर्ता द्वारा 28 राशन कार्डधारकों के खाद्यान्न वितरण के
संबंध में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है , जिससे यह सिद्ध हो सके कि
अपीलकर्ता द्वारा उन्हें सही मात्रा में खाद्यान्न निर्गत किया गया है। अपीलकर्ता द्वारा खाद्यान्न
कम मिलने के संबंध में स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया है कि जाँच के समय दुकान के
बराबर वाले कमरे में रखे हुए खाद्यान्न की गणना पूर्ति निरीक्षक द्वारा यह कहकर नहीं की
गयी कि वह खाद्यान्न दुकान की चौहद्दी में नहीं रखा है। अपीलकर्ता द्वारा दाखिल लिखित
बहस में शेष खाद्यान्न बराबर कमरे में रखा होने की बात कही गयी है तथा दुकान छोटी होने
के कारण बराबर के कमरे में रखा बताया लेकिन जांचाधिकारी ने देखने से मना कर दिया।
परन्तु अपीलकर्ता द्वारा शेष खाद्यान्न को निर्धारित चौहद्दी से भिन्न जगह रखने के संबंध में
सक्षम स्तर से अनुमति के संबंध में कु छ नहीं कहा गया है और न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया
गया है। अतः अपीलकर्ता द्वारा खाद्यान्न को दुकान जिस चौहद्दीध्कमरे में संचालित है , उसमें
न रखकर बगल के कमरे में रखने का कोई स्वीकार्य योग्य कारण अपने स्पष्टीकरण में नहीं
किया है। अपीलकर्ता द्वारा खाद्यान्न वितरण में गम्भीर अनियमितता बरती गयी हैं तथा
3.97 कु ० गेहूँ व 15.59 कु ० चावल की कालाबाजारी की गयी है। तदोपरांत अवर
न्यायालय द्वारा सभी साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए अपीलकर्ता द्वारा बरती गयी
अनियमितताओं के दृष्टिगत उसकी उचित दर की दुकान का अनुबन्ध पत्र प्रश्नगत आदेश
दिनांक 20.09.2023 द्वारा निरस्त किया गया है। अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता द्वारा
कहा गया कि अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण नायब तहसीलदार से कराया है।
नायब तहसीलदार विभागीय अधिकारी नहीं है, इसलिए किसी विभागीय अधिकारी से ही
परीक्षण कराना चाहिए था तभी सही स्थिति निकल के आ सकती थी। दिनांक
11.07.2023 को उप जिलाधिकारी द्वारा विभागीय अधिकारी/क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी से
परिशीलन हेतु नामित किया था लेकिन उनके व्यस्त होने के कारण अन्य विभागीय
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अधिकारी से कराना चाहिए था, नायब तहसीलदार से परिशीलन विधिक नियमावली के
विपरीत है। प्रश्नगत आदेश कानून की दृष्टि में कोई आदेश नहीं है , जिसे पारित करने से पूर्व
ए०आर०ओ० की आख्या का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है तथा जवाब का परिशीलन भी
विभागीय अधिकारी से नहीं कराया है। उक्त संदर्भ में अवर न्यायालय की पत्रावली के
अवलोकन करने पर पाया गया कि विक्रे ती दुकान की जांच पूर्ति निरीक्षक द्वारा की गई है,
जिसकी आख्या पत्रावली के पेज संख्या-115 से 131 पर उपलब्ध है। विक्रे ती द्वारा प्रस्तुत
स्पष्टीकरण के परीक्षण हेतु क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी को निर्देशित किया था परन्तु क्षेत्रीय खाद्य
अधिकारी का संयुक्त आयुक्त(खाद्य) कार्यालय, कानपुर मण्डल, कानपुर सम्बद्ध हो जाने
के कारण विक्रे ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण नायब तहसीलदार से कराया गया है , जिनकी
परीक्षण आख्या दिनांक 28.08.2023 पत्रावली के पेज संख्या-265 से 266 पर उपलब्ध
है। जो कि शासनादेश संख्या-4/2019/1206/29-6-2019-300सा/03 टी० सी०
दिनांक 05.8.2019 में दी गयी व्यवस्था के अनुरूप है। शासनादेश
संख्या-4/2019/1206/29-6-2019-300सा /03टी०सी० दिनांक 05.08.2019 में
उल्लिखित है कि-"उचित दर विक्रे ता द्वारा कारण बताओ नोटिस का उत्तर/स्पष्टीकरण का
परीक्षण, जांच अधिकारी से कम से कम एक श्रेणी ऊपर के किसी अधिकारी अर्थात् यदि
जाँच पूर्ति निरीक्षक द्वारा की गई है, तो उसका परीक्षण क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा अथवा
स्वयं उप जिलाधिकारी द्वारा किया जायेगा। यदि प्रारम्भिक जाँच किसी जिला स्तरीय
अधिकारी से करायी गयी है तो उचित दर विक्रे ता के स्पष्टीकरण के उपरांत उसका परीक्षण
किसी अन्य जिला स्तरीय अधिकारी से कराया जायेगा।" प्रश्नगत आदेश के संदर्भ में
पत्रावली से यह स्पष्ट होता है कि पूर्ति निरीक्षक द्वारा जांच की गयी एवं विक्रे ता द्वारा प्रस्तुत
स्पष्टीकरण का परीक्षण नायब तहसीलदार द्वारा किया गया है। अपीलकर्ता के विद्वान
अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि अपीलकर्ता के विरूद्ध आरोप घटतौली, गलत व्यवहार, अंगूठा
लगाकर खाद्यान्न न देना, बाल्टी से नाप पर खाद्यान्न कम देने के संबंध में जवाब में अवगत
कराया कि खाद्यान्न नहीं दिये जाने की शिकायत के बारे में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।
जबकि अपीलकर्ता ने बिक्री रजिस्टर प्रस्तुत किया है, जिस पर हस्ताक्षर/अंगूठे लगाये गये
हैं, बाल्टी से नापने की शिकायत भी झूठी है क्योंकि जांच में इलेक्ट्रोनिक कांटा जिससे
वितरण किया जाता है, पाया गया है, बाल्टी नहीं पायी गयी है। इसलिए शिकायत झूठी है,
प्रधान ने अपने लोगों से करायी है। शिकायत की पुष्टि हेतु पत्रावली पर कोई साक्ष्य संलग्न
नहीं है। एक अन्य आरोप रे ट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड, पात्र गृहस्थी कार्डों की सूची नहीं मिली व 35
किग्रा० चावल पाया गया, के संबंध में अवगत कराया कि सभी तरह के आवश्यक बोर्ड
दुकान के बाहर लगाये गये थे , जिन्हें प्रधान के द्वारा शरारती लोगों से फड़वा दिया है तथा कु छ
बारिस में भींगने के कारण अस्पष्ट हो गये थे , शेष खाद्यान्न बराबर कमरे में रखा होने की बात
कही, दुकान छोटी होने के कारण बराबर के कमरे में रखा बताया लेकिन जांचाधिकारी ने
देखने से मना कर दिया। इस तरह अपीलकर्ता के विस्तृत जवाब पर गौर किये बिना प्रश्नगत
आदेश पारित किया गया है। अपीलकर्ता का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि
अपीलकर्ता द्वारा शेष खाद्यान्न को निर्धारित चौहद्दी से भिन्न जगह रखने के संबंध में सक्षम
स्तर से अनुमति के संबंध में कु छ नहीं कहा गया है और न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया
है। पूर्ति निरीक्षक द्वारा अपीलकर्ता की दुकान की जांच की गयी है। अवर अवर न्यायालय
द्वारा निलम्बन आदेश, अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण, नायब तहसीलदार की परीक्षण
आख्या आदि सभी साक्ष्यों का अवलोकन, परिशीलन व विश्लेषण करते हुए
अनियमितताओं के दृष्टिगत प्रश्नगत आदेश दिनांक 20.09.2023 पारित किया गया है।
प्रश्नगत आदेश विस्तृत आदेश है और नियमानुसार सम्यक विचारोपरान्त जारी किया गया
है।
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि प्रश्नगत आदेश दिनांक 20.09.2023 पत्रावलित सभी
साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए अनियमितताओं के दृष्टिगत पारित किया गया है। इस
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आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता प्रतीत नही होती। प्रश्नगत आदेश के विरूद्ध
प्रस्तुत अपील बलहीन पाये जाने के कारण निरस्त की जाती है।”
9. Sri I.S. Tripathi, learned counsel for petitioner has submitted that
once a similar nature of allegations were earlier found false and
recommendations were made to withdraw the order of suspension, a
subsequent inquiry on basis of similar nature of allegations within a
period of six weeks would not be justified. Statement recorded during
inspection was later on denied by some cardholders by giving
subsequent statements. According to G.O. dated 05.08.2019, explanation
given by fair price shop licensee to inspection report ought to have been
examined by an officer of one rank above, whereas in present case,
verification was done by an officer lower in rank. On request of
petitioner on subsequent inspection, shortfall of stock was satisfied since
said amount of food-grains were available in other room within the same
premises. Learned counsel also referred contents of memo of appeal.
10. Per contra, Sri R.K. Ojha, learned Additional CSC and Sri Vikas
Upadhyay, Advocate appearing for Sri A.C. Srivastava, learned counsel
for respondents have supported impugned orders that 3 inspections were
conducted and every time stock register was not found up to date. An
attempt of petitioner to explain shortcomings of food grains cannot be
justified on basis of a subsequent inspection, since it was done after six
weeks. Number of irregularities remained unrebutted. Statement of
cardholders recorded subsequently without any affidavit cannot be
accepted.
11. I have considered above submissions and perused the records.
12. The Court is of the view that learned counsel for petitioner has
made out a case for reconsideration of appeal though memo of appeal
has not taken specific grounds, which have been urged before this Court.
Reasons for remand are as follows :-
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(a) Time period between the order passed on basis of first
inquiry and initiation of other inquiry was six weeks i.e. a very
short time and almost on similar nature of complaint;
(b) Cardholders who have given statement during inspection
against petitioner have made statement thereafter denying any
such allegation ;
(c) Effect of subsequent inspection on request wherein stock
which was shown earlier less was found in other room ;
(d) Effect of verification of reply by an Officer lower to Officer
who has conducted inquiry was also not considered ;
13. In aforesaid circumstances, impugned order dated 27.01.2025
passed by Appellate Authority is set aside and matter is remitted to
concerned Appellate Authority to pass a fresh order. The petitioner will
be at liberty to amend memo of appeal, however, it has to be done within
3 weeks from today. No further opportunity will be granted to amend
memo of appeal. Subsequently, preferably within six months thereafter,
the appeal be decided afresh taking note of aforesaid observations made
in this order and amended memo of appeal, if any.
14. Writ petition stands disposed of with above directions,
observations and liberty.
(SAURABH SHYAM SHAMSHERY, J.)
October 01, 2026
<Nirmal>
Digitally signed by :-
NIRMAL SINHA
High Court of Judicature at Allahabad
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