Allahabad High Court
DHARMENDRAversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
In the absence of solid evidence linking the accused to the alleged offence, bail was granted with conditions.
Summary
The applicant, Dharmendra, filed a bail application under sections 137(2), 87 of the Criminal Procedure Code, and section 65(2) of the Indian Evidence Act in connection with FIR No. 259/2025. He alleged that the prosecution’s case was based on false statements, citing sections 180 and 183 of the IPC, and contended that the victim’s age was only sixteen, making the allegations untenable. The State opposed bail, arguing that the alleged offence was serious and that the applicant posed a flight risk. The court examined the statements, the sealed documents opened during the hearing, and found no solid evidence linking the applicant to the crime. Consequently, the court granted bail with strict conditions, ordering the applicant to cooperate with the investigation and refrain from any further wrongdoing.
Issues considered
- Whether bail should be granted to the accused under CrPC sections 137(2) and 87 in view of the alleged offences.
- Whether the evidence on record, including statements under IPC sections 180 and 183, is sufficient to justify denial of bail.
- Whether the applicant poses a risk of tampering with evidence or influencing witnesses if released on bail.
Legislation cited
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 137(2), 87
- Indian Evidence Act, 1872 — s. 65(2)
- Indian Penal Code — s. 180, 183
Subjects
- bail
- Criminal Procedure Code
- Indian Evidence Act
- Indian Penal Code
- false accusation
- Allahabad High Court
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 45034 of 2025
Dharmendra
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Manoj Kumar Srivastava
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. व मान दा क जमानत ना प आवेदक ओर से मु०अ०सं० 259/2025
, अ त धारा 137(2), 87, 65(2) भारतीय य सं ता एवं धारा 5(M)/6 पा
ए , थाना शेरग , ला बरेली जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व के न पर उनके सहयोगी नअ व एवं न अपर
शास य अ व को सुना तथा प वली का प शीलन या।
3. सुनवाई के दौरान सीलबंद फाफा खोला गया, स पी ता का आयु प ण पत है।
इसे प वली पर रखा जाय।
4. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। यहां सं क
त यह है क त पी ता रा अपने धारा 180 व 183 भारतीय नाग क सुर सं ता
के बयान आवेदक के साथ से जाने व वाह करने लेने तथा प -प तरह रहने
का कथन या गया है। इससे प ल त हो रहा है वह सहम देने वाली प कार है।
इस ए, आवेदक जमानत पर मु ये जाने यो है। आगे यह भी कहा गया क त
पी ता के आयु प ण प के अनुसार उस आयु सोलह व है , जो माननीय उ तम
यालय के पा त आदेश के अनु म एक-दो व ऊपर नीचे माना जा सकता है।
आवेदक व पी ता के भावी भ को देखते ए आवेदक जमानत पर मु ये जाने यो
। पुनः उनका कथन है आवेदक ओर से यह आ सन या गया है वह कानून
या सहयोग करने के ए तैयार है और जब भी आव कता होगी वह ईमानदा से
अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और उन सभी श को कार करने के ए भी
तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी। आवेदक ष है तथा वह इस करण ०
18.09.2025 से कारागार है। इस ए, आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
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BAIL No. 45034 of 2025
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5. न अपर शास य अ व ने अ यु के जमानत का बल रोध करते ए त
त या अ यु रा का त अपराध संं य एवं गंभीर कृ का है, इस ए
अ यु को जमानत पर न छो जाय।
6. उभय प के नअ व के त के प एवं प वली पर उपल सारवान
त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और सी
भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना न
होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय संतु पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय
भू त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा
और सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या
पु स अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
, सके कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
8. उपरो श से सी के उ घन के मामले , चारण यालय आवेदक
जमानत यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
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