Allahabad High Court
LALLUversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
In the absence of material evidence indicating a risk of flight or tampering, the applicant is entitled to bail with conditions.
Summary
Lallu applied for bail in a criminal matter (MU/AS 482/2025) invoking sections 137(2), 87, 64(1) of the Constitution and Section 482 of the Criminal Procedure Code. The State alleged that the applicant was involved in a serious offence and sought denial of bail on grounds of possible tampering with evidence and flight risk. The applicant contended that the allegations were false and that there was no likelihood of interfering with the investigation. The court examined the statements of the victim and the police, found no concrete evidence linking the applicant to the alleged crime, and concluded that the risk of witness intimidation or evidence tampering was minimal. Consequently, the court granted bail with strict conditions, including non‑interference with witnesses, compliance with court orders, and a prohibition on committing any further offence. The bail order was pronounced on 19 March 2026.
Issues considered
- Whether the applicant is entitled to bail despite the seriousness of the alleged offence
- Whether there is a likelihood of the applicant tampering with evidence or influencing witnesses
- Whether the applicant poses a flight risk
Legislation cited
- Code of Criminal Procedure, 1973 — s. 482
- Constitution of India — s. 137(2), 64(1), 87
Subjects
- bail
- criminal procedure
- presumption of innocence
- conditions of bail
- flight risk
- evidence tampering
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 6103 of 2026
Lallu
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Pankaj Kumar Singh
Counsel for Opposite Party(s) : Anurag Dubey, G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. व मान दा क जमानत ना प आवेदक ओर से मु०अ०सं० 482/2025
,अ त धारा 137(2), 87, 64(1) भारतीय य सं ता एवं धारा 3/4 पा ए ,
थाना कोतवाली देहात, ला पुर जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के न अ व , प वादी के न अ व एवं न अपर शास य
अ व को सुना तथा प वली का प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व रा अनुपालन शपथ-प दा ल या गया, इसे प वली
पर रखा जाय।
4. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। यहां सं क
त यह है आवेदक व क त पी ता के म म संबंध था। क त पी ता रा अपने
धारा 180 व 183 भारतीय नाग क सुर सं ता के बयान आवेदक के साथ से
जाने, वाह कर लेने, प -प तरह रहने तथा आवेदक के रा कोई जबरद न
करने का कथन या गया है।इससे प ल त है क त पी ता सहम देने वाली
प कार है। आगे यह भी कहा गया क त पी ता के आयु प ण प के अनुसार वह
बा ग है। इस ए, आवेदक जमानत पर मु ये जाने यो है। पुनः उनका कथन है
आवेदक ओर से यह आ सन या गया है वह कानून या सहयोग करने के
ए तैयार है और जब भी आव कता होगी वह ईमानदा से अदालत के सम खुद को
उपल कराएगा और उन सभी श को कार करने के ए भी तैयार है जो यालय उस
पर अ रो त करेगी। आवेदक ष है तथा वह इस करण ० 10.11.2025 से
कारागार है। इस ए आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
5. प वादी के नअ व एवं न अपर शास य अ व ने अ यु के जमानत
र्त
ण्डि
प्र
की
र्ण
प्रा
र्थ
त्र
की
न्त
र्ग
न्या
हि
क्सो
क्ट
जि
मि
र्जा
में
क्त
प्र
स्तु
कि
वि
द्वा
धि
क्ता
रि
वि
द्वा
धि
क्ता
वि
द्वा
की
धि
क्ता
त्रा
रि
कि
वि
द्वा
धि
क्ता
द्वा
त्र
खि
कि
त्रा
वि
द्वा
धि
क्ता
र्क
प्र
स्तु
कि
कि
प्र
में
र्जी
थि
रि
हीं
कि
प्रा
गि
थ्य
कि
थि
ड़ि
ध्य
प्रे
थि
ड़ि
द्वा
रि
क्षा
हि
में
स्वे
च्छा
वि
ति
त्नी
की
द्वा
स्ती
हीं
कि
रि
क्षि
कि
थि
ड़ि
ति
क्ष
कि
थि
ड़ि
री
क्ष
प्र
त्र
लि
लि
क्त
कि
ग्य
कि
की
श्वा
दि
कि
की
प्र
क्रि
में
लि
श्य
री
क्ष
ब्ध
र्तों
स्वी
लि
न्या
धि
पि
नि
र्दो
प्र
में
दि
में
नि
रु
द्ध
लि
ड़
दि
रि
वि
द्वा
धि
क्ता
वि
द्वा
की
धि
क्ता
भि
क्त
BAIL No. 6103 of 2026
2
का बल रोध करते ए त त या अ यु रा का त अपराध संं य एवं
गंभीर कृ का है, इस ए अ यु को जमानत पर न छो जाय।
6. उभय प के नअ व के त के प एवं प वली पर उपल सारवान
त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और सी
भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना न
होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय संतु पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय
भू त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा
और सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या
पु स अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
, सके कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
8. उपरो श से सी के उ घन के मामले , चारण यालय आवेदक
जमानत यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
CP.sahani
प्र
वि
हु
र्क
प्र
स्तु
कि
कि
भि
क्त
द्वा
रि
ज्ञे
प्र
ति
लि
भि
क्त
ड़ा
क्ष
वि
द्वा
धि
क्ता
र्कों
रि
प्रे
क्ष्य
त्रा
ब्ध
थ्यों
रि
स्थि
ति
यों
ग्र
रू
तों
की
प्र
ति
कि
वि
त्म
ग्री
की
स्थि
ति
ब्ध
ग्री
ड़
ड़
की
थ्य
हु
री
में
क्त
क्त
बि
टि
प्प
कि
हु
क्त
र्णि
में
धि
न्या
की
ष्टि
व्य
क्ति
त्र
धि
शि
स्था
प्र
ति
प्र
स्तु
नि
म्न
लि
खि
र्तों
ड़
दि
वि
री
क्ष
भि
क्ष्यों
ड़
ड़
हीं
भि
क्षि
यों
ड़ि
शि
र्ता
हीं
न्या
शों
री
क्ष
बि
श्य
स्थ
लि
नि
ति
थि
न्या
में
स्थि
री
क्ष
में
री
रि
की
स्व
त्र
दु
रू
कि
धि
ति
वि
धि
में
लि
प्त
हीं
धि
त्य
प्र
त्य
क्ष
प्र
त्य
क्ष
रू
थ्यों
रि
चि
कि
व्य
क्ति
लि
धि
रि
यों
प्र
की
हीं
Digitally signed by :-
जि
न्हें
न्या
में
थ्यों
वि
क्त
र्तों
में
कि
ल्लं
में
वि
न्या
की
CHANDRA PRAKASH SAHANI
नि
द्द
स्व
त्र
High Court of Judicature at Allahabad
Checking your session…