Allahabad High Court
SUNIL KUMAR KUSHWAHAversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that the prosecution failed to produce sufficient evidence to justify denial of bail and therefore granted bail with conditions.
Summary
The High Court of Allahabad considered a bail application filed by Sunil Kumar Kushwaha, who was arrested under sections 64(2)F, 64(2)(M) and 351(2) of the Uttar Pradesh Act, 2023, alleging false implication in a crime. The applicant contended that the FIR was lodged seven months after the alleged incident and that there was no material evidence linking him to the offence. The prosecution argued that the applicant was involved in the alleged crime, but the court found the evidence insufficient to establish a prima facie case. After examining the material on record, the court concluded that continued detention was unwarranted. Consequently, the court granted bail subject to strict conditions ensuring the applicant’s cooperation with the investigation and prohibiting any intimidation of witnesses.
Issues considered
- Whether the evidence on record establishes a prima facie case against the applicant under sections 64(2)F, 64(2)(M) and 351(2).
- Whether the applicant is entitled to bail despite the nature of the alleged offences.
- Whether the conditions imposed by the court are appropriate to safeguard the investigation.
Legislation cited
- Indian Evidence Act, 1872 — s. 180, 183
- Uttar Pradesh Act, 2023 — s. 351(2), 64(2)F, 64(2)(M)
Subjects
- bail
- false implication
- sections 64(2)F
- section 64(2)(M)
- section 351(2)
- evidence
- criminal procedure
- conditions of bail
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9255 of 2026
Sunil Kumar Kushwaha
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Jaya Goswami, Rajiv Kumar Tripathi
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक सुनील कुमार ओर
से मु.अ.सं० 102/2025 अ त धारा 64(2)एफ/ 64(2)(एम)/ 351(2) बी.ए .एस. 2023,
थाना कै या, ला जालौन जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। थम सूचना पो
के अनुसार घटना नांक 04.01.2025 होने का कथन या गया है जब थम सूचना
पो के अवलोकन से यह द त होता है पी ता रा नांक 28.08.2025 को थम
सूचना पो द कराने को श गयी लगभग 7 महीन पी ता रा कोई कायत सी
थाने द न करायी गयी। उ ल का समु त करण पी ता रा थम सूचना
पो द न कराया गया। पी ता रा थम सूचना पो एवं अंत त धारा 180/183
बी.ए .एस.एस. वी यो वायरल करने का कथन या गया जब उ के संबंध कोई भी
फोटो व वी प वली पर उपल न है। पुनः उनका कथन है आवेदक ओर से यह
आ सन या गया है वह कानून या सहयोग करने के ए तैयार है और जब भी
आव कता होगी वह ईमानदा से अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और उन सभी
श को कार करने के ए भी तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी। आवेदक
ष है तथा वह इस करण ० 17.01.2026 से कारागार है इस ए आवेदक
को जमानत पर छो या जाय।
4. न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध
करते ए त त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है,
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BAIL No. 9255 of 2026
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इस ए आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
5. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 18, 2026
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High Court of Judicature at Allahabad
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