Allahabad High Court
ADILversusSTATE OF U.P.
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court held that bail must be granted because the allegations were false and the prosecution failed to produce any solid evidence establishing a prima facie case.
Summary
The applicant, Adil, filed a bail application in the Allahabad High Court seeking release on bail in a case registered as MU‑A‑110/2025 under Section 69 of the Indian Penal Code. The prosecution alleged that the applicant had committed a sexual offence, relying on the complainant’s statements and references to Sections 180 and 183 of the Evidence Act. The applicant contended that the allegations were false, the complainant’s testimony was contradictory, and there was no material evidence linking him to the offence. The court examined the credibility of the complainant’s statements, the lack of corroborative evidence, and the possibility of the applicant being falsely implicated. Finding the prosecution’s case weak and the allegations unsubstantiated, the court granted bail with strict conditions. The decision underscores the principle that bail should be granted when the prosecution fails to establish a prima facie case.
Issues considered
- Whether the applicant is entitled to bail under Section 69 of the Indian Penal Code given the nature of the allegations.
- Whether the evidence presented by the prosecution is sufficient to justify continued detention.
- Whether the complainant’s statements under Sections 180 and 183 of the Evidence Act are reliable.
Legislation cited
- Indian Evidence Act, 1872 — s. 180, 183
- Indian Penal Code — s. 69
Subjects
- bail
- false allegations
- Section 69 IPC
- Evidence Act
- pre‑trial detention
- criminal procedure
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9396 of 2026
Adil
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P.
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Ravi Sahu
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक आ ल ओर से
मु०अ०सं०-110/2025 धारा-69 बी.ए .एस. थाना- प नगर, ला कानपुर नगर जमानत
पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। थम सूचना पो
ल से द करायी गयी ल का कोई करण न या गया। उ घटना का कोई
तं सा नही है। आवेदक के नअ व का कथन है पी ता रा एफआईआर
और साथ ही धारा 180 और 183 बी.एन.एस.एस. के बया पी ता ने आवेदक के
लाफ आरोप लगाया है वह उसके साथ शादी के बहाने कई बार यौन संबंध त
ए, उसके बाद भी उसने उससे शादी न और बराबर शादी से इनकार करता रहा।
उ ने आगे यह भी कथन या पी ता एक धवा, तीन ब मां है जो पू तः
एक वय म ला है। पी ता रा अंत त धारा 183 बी.एन.एस.एस. के बयान यह
कथन या गया है वह आवेदक के साथ व इन लेशन प रह रही थी। पी ता के
उ बया के अवलोकन से ऐसा तीत होता है पी ता, आवेदक के साथ संबंध थी
और उनके बीच जो भी यौन संबंध क त ए थे, वे सहम से थे, इस कार, बी.एन.एस.
धारा 69 का आरोप आवेदक पर न बनता है। दो साल लंबी अव से संबंध
थे और इस संबंध पी ता रा कोई पू कायत न गई है, इस ए, ऐसा तीत
होता है आवेदक को झूठे और तु आरो और वनापू इरादे से मामले फंसाया
गया है। पुनः उनका कथन है आवेदक ओर से यह आ सन या गया है वह कानून
या सहयोग करने के ए तैयार है और जब भी आव कता होगी वह ईमानदा से
अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और उन सभी श को कार करने के ए भी
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BAIL No. 9396 of 2026
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तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी। आवेदक ष है तथा वह इस करण ०
23.10.2025 से कारागार है इस ए आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
4. न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध
करते ए त त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है,
इस ए आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
5. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
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High Court of Judicature at Allahabad
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