Allahabad High Court
KALLU SINGHversusSTATE OF U.P. AND ANOTHER
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The court granted bail to the applicant, finding insufficient evidence to justify its denial and imposing conditions to mitigate any risk of interference with the investigation.
Summary
Kallu Singh, who has been in custody since 13 January 2026, applied for bail in connection with offences under Sections 74, 64(1) and 351(3) of the Indian Penal Code. The State opposed the bail, alleging that the applicant was involved in the alleged offences and might tamper with evidence. The court examined the material on record, noted the absence of any concrete evidence linking the applicant to the alleged crime and found a low risk of tampering. It also considered the applicant's statements under Sections 180 and 183 of the Indian Evidence Act and found them inconsistent. Consequently, the court held that the applicant was entitled to bail, subject to strict conditions to ensure his cooperation with the investigation and to prevent any intimidation of witnesses. The bail was granted with conditions that the applicant would not threaten witnesses, would cooperate with the court, and would not commit any further offence.
Issues considered
- Whether the applicant Kallu Singh is entitled to bail despite the serious nature of the charges under IPC Sections 74, 64(1) and 351(3).
- Whether the evidence on record justifies denial of bail on grounds of risk of tampering or intimidation of witnesses.
Legislation cited
- Code of Criminal Procedure — s. 439
- Indian Evidence Act, 1872 — s. 180, 183
- Indian Penal Code — s. 351(3), 64(1), 74
Subjects
- bail
- Criminal Procedure
- Indian Penal Code
- evidence
- witness intimidation
- Allahabad High Court
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9404 of 2026
Kallu Singh
.....Applicant(s)
Versus
State of U.P. and Another
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Anand Vibhor Singh, Karunesh Pratap
Singh
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुन त व मान दा क जमानत ना प , आवेदक क ह ओर से
मु.अ.सं० 539/2025 अ त धारा 74/ 64(1)/ 351(3) बी.ए .एस. थाना रसूलाबाद, ला
कानपुर देहात जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के नअ व एवं न अपर शास य अ व को सुना तथा प वली का
प शीलन या।
3. अनुदेश के अनुसार प सं० 2 को नो स त/तामील कराया जा चुका है
पर उन ओर से कोई उप त न है।
4. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। क त पी ता रा
अपने धारा 180 भारतीय नाग क सुर सं ता के बयान आवेदक पर छे डछा का
आरोप आ तन या तु राशय के तहत अपने धारा 183 भारतीय नाग क सुर
सं ता के बयान आवेदक के आरोप का अ कथन या गया। क त
पी ता के धारा 180 व 183 भारतीय नाग क सुर सं ता के बयान पर र रोधाभाष
है। इस ए आवेदक जमानत पर मु ये जाने यो है। पुनः उनका कथन है आवेदक
ओर से यह आ सन या गया है वह कानून या सहयोग करने के ए तैयार है
और जब भी आव कता होगी वह ईमानदा से अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और
उन सभी श को कार करने के ए भी तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी।
आवेदक ष है तथा वह इस करण ० 13.01.2026 से कारागार है इस ए
आवेदक को जमानत पर छो या जाय।
5.
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BAIL No. 9404 of 2026
2
न अपर शास य अ व ने आवेदक के नअ व के त का बल रोध करते
एत त या आवेदक रा का त अपराध सं य एवं गं र कृ का है, इस ए
आवेदक को जमानत पर न छो जाये।
6. आवेदक के नअ व के त के प गत करण प वली पर उपल
सारवान त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और
सी भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना
न होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
7. अतः वाद के गुण दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय स पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय भू
त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा और
सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या पु स
अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, सके
कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
उपरो श से सी के उ घन के मामले , प ण यालय आवेदक जमानत
यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 19, 2026
S.Mishra
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