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Allahabad High Court

DEEPAK RAIDASversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS

Decided

Holding

In the absence of solid evidence and any opposition, the court held that the applicant is entitled to bail subject to strict conditions.

Summary

The applicant, Deepak Raidas, was arrested under sections 137(2) and 64(1) of the B.N.S. Act and sections 5 and 6 of the Poxos Act in connection with an alleged love‑affair‑related offence. He contended that the accusation was false, that both he and the alleged victim are adults who love each other, and that he had already married the victim in Gwalior. The prosecution did not raise any objection to the bail petition and no substantive evidence was produced against the applicant. The court observed that the material on record was insufficient to justify continued detention and that there was no risk of tampering with evidence or intimidation of witnesses. Accordingly, the court granted bail, imposing five specific conditions to ensure the applicant’s cooperation with the trial. The order also warned that any breach of the conditions would lead to revocation of bail.

Issues considered

  • Whether the applicant is entitled to bail despite the pending charges under the B.N.S. Act and the Poxos Act.
  • Whether the lack of solid evidence and the absence of opposition justify the grant of bail.

Legislation cited

  • B.N.S. Act — s. 137(2), 64(1)
  • Poxos Act — s. 5, 6

Subjects

  • bail
  • criminal procedure
  • false accusation
  • love affair
  • conditions of bail

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
           CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9407 of 2026

Deepak Raidas
                                                                             .....Applicant(s)
                                            Versus

State Of U.P. And 3 Others
                                                                                .....Opposite
                                                                                      Party(s)

Counsel for Applicant(s)      : Akhand Pratap Singh, Shobhit Yadav
Counsel for Opposite Party(s) : Arun Kumar Bajpai, G.A.

Court No. - 65
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक दीपक रैदास की ओर से
मु.अ.सं० 332/2024 अन्तर्गत धारा 137(2)/ 64(1) बी.एऩ.एस. एवं 5/6 पॉक्सो एक्ट,
थाना गिरवां, जिला बांदा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, परिवादी के विद्वान अधिवक्ता अरूण कुमार एवं विद्वान अपर
शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं
फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। आवेदक के विद्वान
अधिवक्ता द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से यह प्रस्तर 17 एवं 18 में यह उल्लिखित किया गया
आवेदक और पीड़िता दोनो बालिग है और वह एक दूसरे से प्रेम करते हैं। पीड़िता ने जब यह
बात अपने घर वालों से बतायी तो घर वालों ने उसकी शादी कहीं और कराने का निर्णय लिया
जिसे वह पहले से नहीं जानती थी और वह पीड़िता से उम्र में भी बड़ा था। इस बात का पीड़िता
द्वारा जब विरोध किया गया तो सूचनाकर्ता द्वारा आवेदक को उक्त मामले में आरोपित करके उसे
अभियुक्त बना दिया गया जबकि आवेदक द्वारा अपने शपथ पत्र के माध्यम से यह कथन किया
गया कि वह पीड़िता से ग्वालियर में शादी कर चुका है और अब वह आगे का जीवन पीड़िता के
साथ बिताना चाहता है और उसको ससम्मान अपने घर रखने को तैयार है। पुनः उनका कथन है
कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के
लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध
कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर
अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 29.10.2025 से कारागार में
निरुद्ध है इसलिए आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

4. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता उक्त तथ्यों से कोई आपत्ति
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                                                                               2


                                    नहीं है।

                                    5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध
                                    सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और
                                    किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छे ड़छाड़ की संभावना
                                    न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार
                                    है।

                                    6. अतः वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में
                                    संबंधित न्यायालय की सन्तुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू
                                    प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय।

                                          1. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छे ड़छाड़ नहीं करेगा।

                                          2. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

                                          3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई
                                               अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में
                                               ईमानदारी से सहयोग करेगा।

                                          4. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और
                                               किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

                                          5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस
                                               अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके
                                               कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे ़

                                    उपरोक्त शर्तों में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत
                                    नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।

                                    * आवेदक द्वारा इस आदेश के प्रस्तर 03 में उल्लिखित कथनों का यदि अक्षरशः पालन न
                                    किया गया तो पीड़िता उक्त जमानत को निरस्त करने के लिए स्वतंत्र है।



                                                                                                 (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
                                    March 19, 2026
                                    S.Mishra




Digitally signed by :-
SHASHI MISHRA
High Court of Judicature at Allahabad


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