Allahabad High Court
WAJIDversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The Court held that a prima facie case exists and therefore the application under Section 528 to quash the proceedings must be rejected.
Summary
The applicant filed an application under Section 528 of the Indian Penal Code seeking quash of FIR No. 285/2025, alleging that the complaint was malicious, delayed, and that the alleged victim was an adult. The applicant's counsel argued that no offence was made out and that the proceedings were a counter‑blasting measure. The respondent's counsel contended that a charge sheet had been filed and that the lower court's order was based on sufficient material. The High Court examined the submissions and held that, on a prima facie basis, an offence could be inferred and therefore the application could not be entertained under Section 528. Consequently, the petition to quash the proceedings was dismissed.
Issues considered
- Whether the FIR and the subsequent charge sheet disclose a prima facie case of an offence under Section 528 IPC.
- Whether the application under Section 528 to quash the criminal proceedings is maintainable.
Legislation cited
- B.N.S. Act — s. 64(1)
- Child Marriage Prohibition Act — s. 10, 11, 9
- Indian Penal Code — s. 528
- Paxso Act — s. 3/4(2)
Subjects
- Section 528 IPC
- quash petition
- prima facie case
- FIR
- child marriage
- criminal procedure
- abuse of process
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 39460 of 2026
Wajid
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Ram Ashish Yadav
Counsel for Opposite Party(s) : G.A.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं०
285/2025, अंतर्गत धारा 64(1) बी.एन.एस. व धारा 3/4(2) पाक्सो एक्ट तथा धारा 9, 10, 11 बाल विवाह
प्रतिषेध अधिनियम, थाना मिलक, जिला रामपुर में प्रेषित आरोप पत्र, दिनांकित 18.11.2025 से उद्भूत विषेष
वाद/एफ०आर०सं० 19/2026 में विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट), रामपुर द्वारा पारित तलबी आदेश दि०
20.02.2026 तथा इस वाद की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन
किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वर्तमान
अभियोजन दुर्भावनापूर्ण इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संस्थित किया गया है। यहां प्रासंगिक है कि प्रथम
सूचना रिपोर्ट अतिविलंब से पंजीकृत कराया गया है तथा कथित घटना के समय कथित पीड़िता वास्तव में
बालिग थी। वर्तमान प्रथम सूचना रिपोर्ट कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है, जो पूरी तरह से मनगढ़ंत और
आवेदक को परेशान करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से बनाई गई है। पक्षों के बीच विवाह 20.10.2024 को
आपसी सहमति से शांतिपूर्वक संपन्न हुआ था और वे बिना किसी विवाद के आपस में सौहार्दपूर्ण ढंग से रहे।
एफआईआर में लगाए गए आरोप पूरी तरह से अस्पष्ट हैं, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि यह एक जवाबी
कार्रवाई (काउं टर ब्लास्ट) का मामला है। आवेदक के विरुद्ध प्रथम दृष्टय कोई भी मामला नहीं बनता है। पुनः
उनके द्वारा अपने तर्क के समर्थन में कुछ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के उपरांत
अभियुक्त के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है तथा उस पर संबधि
ं त विचारण न्यायालय द्वारा पर्याप्त
आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है तथा अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त
करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उठाए गए तर्क में तथ्यात्मक विवाद का न्यायिक निर्णय
(adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शामिल है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों एवं अभिलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर
मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार
NA528 No. 39460 of 2026
2
(न्यायालय) के समक्ष किए गए सभी अभिवचन (submissions) तथ्य के विवादित प्रश्नों से संबधि
ं त हैं,
जिनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतर्गत न्यायिक निर्णय नहीं किया जा सकता है।
इस चरण पर केवल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय
द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हरियाणा राज्य बनाम भजन
लाल, 1992 एससीसी (क्रिमिनल) 426, बिहार राज्य बनाम पी.पी. शर्मा, 1992 एससीसी (क्रिमिनल)
192 और अंत में झंडू फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड बनाम मोहम्मद शराफुल हक एवं अन्य (पैरा-10)
2005 एससीसी (क्रिमिनल) 283 के मामलों में प्रतिपादित कानून के आलोक में स्पष्ट किया गया है। इसलिए,
इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की प्रार्थना को अस्वीकार किया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।
8. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबधि
ं त अवर न्यायालय को अविलम्ब
भेजना सुनिश्चित किया जाय।
9. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
September 17, 2026
CP.sahani
Digitally signed by :-
CHANDRA PRAKASH SAHANI
High Court of Judicature at Allahabad
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