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Allahabad High Court

HAMIDUN NISHA AND ANOTHERversusSTATE OF U.P. AND 7 OTHERS

Decided

Holding

Adult consenting individuals have a protected right to live together, and the State must prevent any unlawful interference with that right.

Summary

The petitioners, two adult women in a live‑in relationship, sought a permanent protection order under Article 226 of the Constitution, alleging threats and harassment from family members and requesting police protection for their peaceful cohabitation. The respondents, the State of Uttar Pradesh and others, contested the petition. The Court noted that both petitioners are adults, have provided identity proof, and that a similar petition (RIT No. 35171/2025) had been decided earlier on identical facts. Relying on the fundamental right to life and personal liberty under Article 21, the Court held that no family member or third party can interfere with the consensual relationship of adults. Consequently, the Court directed police authorities to ensure the petitioners' safety and to refrain from any punitive action unless a criminal case is filed, and disposed of the petition with the specified directions.

Issues considered

  • Whether adult consenting individuals have a constitutional right to live together in a live‑in relationship without interference.
  • Whether the State is obligated to issue a protection order under Article 226 to safeguard that right.
  • Whether family members' threats constitute a violation of the petitioners' right to life and personal liberty.

Legislation cited

Subjects

  • live-in relationship
  • right to life
  • personal liberty
  • protection order
  • Article 21
  • Article 226
  • family interference
  • adult consent

Judgment

           HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
                             WRIT - C No. - 35875 of 2026

Hamidun Nisha And Another
                                                                       .....Petitioner(s)
                                          Versus

State Of U.P. And 7 Others
                                                                     .....Respondent(s)

Counsel for Petitioner(s)                          :   Vijay Kumar Kashyap
Counsel for Respondent(s)                          :   C.S.C.

Court No. - 75
                 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान स्थायी अधिवक्ता को सुना एवं पत्रावली का
परिशीलन किया।

2- आदेश दिनांक 09.09.2026 के अनुपालन में आज विद्वान मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वारा
दिशा-निर्देश दाखिल किया गया, जिसे पत्रावली पर "X" के रूप में संलग्न किया जाए।

3- याचीगण की ओर से इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने
की मांग कर रहे हैं, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को याचीगण के शांतिपूर्ण जीवन (लिव इन
रिलेशनशिप) में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाए एवं संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश
देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें।

4- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि दोनों याचीगण बालिग हैं तथा उक्त के संबंध
में उनके द्वारा हाईस्कू ल प्रमाणपत्र/आधारकार्ड की प्रतिलिपि संलग्न की गयी है। वे लिव-इन
रिलेशनशिप में रह रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त यह भी कथन किया गया है कि निजी प्रतिवादी और
परिवार के अन्य सदस्य नाराज हो गए हैं और उनके जीवन को गंभीर खतरा है क्योंकि उन्हें
धमकी दी जा रही है और परेशान किया जा रहा है। इसलिए, याचिकाकर्ताओं ने निजी
प्रतिवादियों से अपने जीवन की रक्षा के लिए पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी करने के लिए
भारत के संविधान के अनुच्छे द 226 के तहत यह रिट याचिका दायर की है।

5- आदेश दिनांक 09.09.2026 को विद्वान मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देशित किया गया
था कि याची सं० 1 की पूर्व शादी एवं तलाक के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने
हेतु निर्देशित किया गया थी, जिसके संबंध में विद्वान मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वारा कथन किया
गया कि समुचित दिशा-निर्देश प्राप्त हो चुके हैं तथा याची सं० 1 का उसके पूर्व पति से तलाक
हो चुका है एवं याची सं० 1 की पूर्व में जिस व्यक्ति से शादी हुई थी, उसकी माँ द्वारा भी लिखित
आवेदन पत्र दिया गया था कि याची सं० 1 की वर्तमान स्थिति/लिव-इन-रिलेशनशिप से उन्हें
                                                                WRIC No. 35875 of 2026
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कोई आपत्ति अथवा वास्ता-सरोकार नहीं है।

6- वर्तमान याचिका में उल्लेखित मामले पर पूर्व में ही रिट-सी संख्या 35171/2025 (
आकांक्षा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और तीन अन्य), निर्णय दिनांकित
17.12.2025 को आदेश पारित किया जा चुका है। वर्तमान मामले के तथ्य उल्लेखित
याचिका के समान हैं। इसलिए वर्तमान रिट याचिका का निपटारा निम्नानुसार किया जा रहा है
7- एक बार जब कोई व्यक्ति, जो वयस्क है, अपना जीवनसाथी चुन लेता है, तो किसी अन्य
व्यक्ति, चाहे वह परिवार का सदस्य ही क्यों न हो, को आपत्ति करने और उनके शांतिपूर्ण जीवन
में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। राज्य का यह कर्तव्य है, जैसा कि उन पर संवैधानिक
दायित्वों के अनुसार सौंपा गया है, कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा
करे। मानव जीवन के अधिकार को बहुत उच्च स्थान दिया जाना चाहिए, चाहे नागरिक नाबालिग
हो या वयस्क, विवाहित हो या अविवाहित। याचीगण द्वारा विवाह संपन्न न होने से उन्हें भारत
के संविधान में निहित मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे भारत के
नागरिक हैं। न्यायालय यह मानने में कोई संकोच नहीं करता कि भारत के संविधान के अनुच्छे द
21 के अंतर्गत प्राप्त मौलिक अधिकार का विशेष महत्व है। यह पवित्र अधिकार है और
संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत विवाह संपन्न होने या न होने की स्थिति में भी इसकी रक्षा की
जानी चाहिए।
8- चूंकि याचीगण जो बालिग हैं, ने विवाह की पवित्रता के बिना एक साथ रहने का निर्णय
लिया है और उनके इस निर्णय पर न्यायालयों का कोई अधिकार नहीं है। यदि याचिकाकर्ताओं
ने कोई अपराध नहीं किया है, तो न्यायालय को उनकी सुरक्षा प्रदान करने की प्रार्थना को
स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं दिखता।
9- अतः मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय का यह मत है कि
याचीगण को शांतिपूर्वक एक साथ रहने की स्वतंत्रता है और किसी को भी उनके शांतिपूर्ण
जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छे द
21 के तहत सुनिश्चित एक मौलिक अधिकार है, जिसमें यह प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति को
उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा
किसी अन्य तरीके से वंचित नहीं किया जाएगा।

10- यदि याचीगण के शांतिपूर्ण जीवन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो याचीगण
इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ संबंधित पुलिस आयुक्त/एसएसपी/एसपी से संपर्क करेंगे
और पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करने के बाद कि याचीगण वयस्क हैं और स्वेच्छा से एक
साथ रह रहे हैं, याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे। यदि याचीगण शिक्षित हैं और वे
अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र और कानून के तहत मान्य अन्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं, जिनसे
यह स्पष्ट होता है कि वे वयस्क हैं और अपनी मर्जी से रह रहे हैं, तो कोई भी पुलिस अधिकारी
                                                                                                    WRIC No. 35875 of 2026
                                                                        3


                                    उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा, जब तक कि उनके खिलाफ किसी भी
                                    अपराध के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज न हो। यदि उनके पास आयु संबंधी कोई दस्तावेजी
                                    प्रमाण नहीं है और वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और/या निरक्षर/अर्ध-साक्षर हैं, तो पुलिस
                                    अधिकारी उनकी सही उम्र का पता लगाने के लिए उनका ऑसिफिकेशन टेस्ट करवा सकता है
                                    और कानून के अंतर्गत प्रदत्त दूसरी प्रक्रियाओं का भी पालन कर सकता है।

                                    11- उपरोक्त दिशा-निर्देशों के साथ वर्तमान याचिका निस्तारित की जाती है।


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                                    September 23, 2026
                                    Pawan Kumar




Digitally signed by :-
PAWAN KUMAR
High Court of Judicature at Allahabad


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