Allahabad High Court
TARANNUM AND ANOTHERversusSTATE OF U.P. AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
Adult persons have a fundamental right to live together in a live‑in relationship and the State must protect that right under Article 21, permitting the Court to issue a protection order under Article 226.
Summary
The petitioners, two adult unmarried individuals in a live‑in relationship, filed a writ petition under Article 226 of the Constitution seeking a protection order against interference by family members and requesting police protection. They submitted identity documents to establish adulthood. The Court noted that a similar petition (RIT‑C No. 35171/2025) had been decided earlier on identical facts. Relying on the fundamental right to life and personal liberty under Article 21, the Court held that no family member can obstruct the peaceful cohabitation of consenting adults and that the State has a constitutional duty to protect this right. Accordingly, the Court directed that police authorities ensure the petitioners' safety and refrain from any punitive action unless a criminal FIR is filed. The order was issued with procedural guidelines for verification of age and consent, and the petition was disposed in favour of the petitioners.
Issues considered
- Whether adult individuals in a consensual live‑in relationship are entitled to protection under Article 21 of the Constitution.
- Whether the High Court can issue a protection order under Article 226 to restrain family members from interfering with such a relationship.
- Whether police can be directed to provide protection in the absence of any criminal complaint.
Legislation cited
- Constitution of India — s. Article 21, Article 226
Subjects
- live‑in relationship
- right to life
- Article 21
- Article 226
- protection order
- police protection
- adult consent
- constitutional rights
- family interference
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
WRIT - C No. - 38496 of 2026
Tarannum And Another
.....Petitioner(s)
Versus
State Of U.P. And 3 Others
.....Respondent(s)
Counsel for Petitioner(s) : Sapana Singh, Swati Pandey
Counsel for Respondent(s) : C.S.C.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान स्थायी अधिवक्ता को सुना एवं पत्रावली का
परिशीलन किया।
2- याचीगण की ओर से इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने
की मांग कर रहे हैं, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को याचीगण के शांतिपूर्ण जीवन (लिव इन
रिलेशनशिप) में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाए एवं संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश
देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें।
3- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि दोनों याचीगण बालिग हैं तथा उक्त के संबंध
में उनके द्वारा हाईस्कू ल प्रमाणपत्र एवं आधारकार्ड की प्रतिलिपि संलग्न की गयी है। वे
अविवाहित हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त यह भी कथन किया
गया है कि निजी प्रतिवादी और परिवार के अन्य सदस्य नाराज हो गए हैं और उनके जीवन को
गंभीर खतरा है क्योंकि उन्हें धमकी दी जा रही है और परेशान किया जा रहा है। इसलिए,
याचिकाकर्ताओं ने निजी प्रतिवादियों से अपने जीवन की रक्षा के लिए पुलिस अधिकारियों को
निर्देश जारी करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छे द 226 के तहत यह रिट याचिका दायर
की है।
4- वर्तमान याचिका में उल्लेखित मामले पर पूर्व में ही रिट-सी संख्या 35171/2025 (
आकांक्षा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और तीन अन्य), निर्णय दिनांकित
17.12.2025 को आदेश पारित किया जा चुका है। वर्तमान मामले के तथ्य उल्लेखित
याचिका के समान हैं। इसलिए वर्तमान रिट याचिका का निपटारा निम्नानुसार किया जा रहा है
5- एक बार जब कोई व्यक्ति, जो वयस्क है, अपना जीवनसाथी चुन लेता है, तो किसी अन्य
व्यक्ति, चाहे वह परिवार का सदस्य ही क्यों न हो, को आपत्ति करने और उनके शांतिपूर्ण जीवन
में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। राज्य का यह कर्तव्य है, जैसा कि उन पर संवैधानिक
दायित्वों के अनुसार सौंपा गया है, कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा
करे। मानव जीवन के अधिकार को बहुत उच्च स्थान दिया जाना चाहिए, चाहे नागरिक नाबालिग
WRIC No. 38496 of 2026
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हो या वयस्क, विवाहित हो या अविवाहित। याचीगण द्वारा विवाह संपन्न न होने से उन्हें भारत
के संविधान में निहित मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे भारत के
नागरिक हैं। न्यायालय यह मानने में कोई संकोच नहीं करता कि भारत के संविधान के अनुच्छे द
21 के अंतर्गत प्राप्त मौलिक अधिकार का विशेष महत्व है। यह पवित्र अधिकार है और
संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत विवाह संपन्न होने या न होने की स्थिति में भी इसकी रक्षा की
जानी चाहिए।
6- चूंकि याचीगण जो बालिग हैं, ने विवाह की पवित्रता के बिना एक साथ रहने का निर्णय
लिया है और उनके इस निर्णय पर न्यायालयों का कोई अधिकार नहीं है। यदि याचिकाकर्ताओं
ने कोई अपराध नहीं किया है, तो न्यायालय को उनकी सुरक्षा प्रदान करने की प्रार्थना को
स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं दिखता।
7- अतः मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय का यह मत है कि
याचीगण को शांतिपूर्वक एक साथ रहने की स्वतंत्रता है और किसी को भी उनके शांतिपूर्ण
जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छे द
21 के तहत सुनिश्चित एक मौलिक अधिकार है, जिसमें यह प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति को
उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा
किसी अन्य तरीके से वंचित नहीं किया जाएगा।
8- यदि याचीगण के शांतिपूर्ण जीवन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो याचीगण
इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ संबंधित पुलिस आयुक्त/एसएसपी/एसपी से संपर्क करेंगे
और पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करने के बाद कि याचीगण वयस्क हैं और स्वेच्छा से एक
साथ रह रहे हैं, याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे। यदि याचीगण शिक्षित हैं और वे
अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र और कानून के तहत मान्य अन्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं, जिनसे
यह स्पष्ट होता है कि वे वयस्क हैं और अपनी मर्जी से रह रहे हैं, तो कोई भी पुलिस अधिकारी
उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा, जब तक कि उनके खिलाफ किसी भी
अपराध के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज न हो। यदि उनके पास आयु संबंधी कोई दस्तावेजी
प्रमाण नहीं है और वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और/या निरक्षर/अर्ध-साक्षर हैं, तो पुलिस
अधिकारी उनकी सही उम्र का पता लगाने के लिए उनका ऑसिफिकेशन टेस्ट करवा सकता है
और कानून के अंतर्गत प्रदत्त दूसरी प्रक्रियाओं का भी पालन कर सकता है।
9- उपरोक्त दिशा-निर्देशों के साथ वर्तमान याचिका निस्तारित की जाती है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
September 23, 2026
Pawan Kumar
Digitally signed by :-
PAWAN KUMAR
High Court of Judicature at Allahabad
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