Allahabad High Court
RIZWAN ANSARI ALIAS RIJAVANversusSTATE OF U.P. THRU. PRINCIPAL SECRETARY HOME AND 3 OTHERS
- Decided
- Bench
- GAUTAM CHOWDHARY
Holding
The Court held that the applicant is entitled to bail.
Summary
The High Court of Allahabad heard bail application No. 43256 of 2025 filed by Rizwan Ansari, who was arrested in connection with FIR No. 155/2025 under provisions of the Indian Constitution (Articles 64(1), 351(3), 3/4(2)) and alleged offences. The applicant contended that the case was false, that the prosecution’s reliance on sections 180 and 183 of the Indian Evidence Act was improper, and that there was no material evidence linking him to the alleged crime. The State opposed bail, arguing that the offences were serious and that the applicant might tamper with evidence or influence witnesses. After examining the material on record, the Court found no substantive evidence to justify continued detention and held that the applicant was not a flight risk nor likely to interfere with the investigation. Accordingly, the Court ordered that the applicant be released on bail subject to strict conditions. The order was pronounced on 18 March 2026.
Issues considered
- Whether the applicant is entitled to bail despite the seriousness of the alleged offences
- Whether the prosecution’s reliance on sections 180 and 183 of the Indian Evidence Act is justified
- Whether there is a risk of the applicant tampering with evidence or influencing witnesses
Legislation cited
- Constitution of India — s. Article 3/4(2), Article 351(3), Article 64(1)
- Indian Evidence Act, 1872 — s. 180, 183
Subjects
- bail
- false case
- Indian Evidence Act
- Constitution of India
- criminal procedure
- court order
Judgment
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 43256 of 2025
Rizwan Ansari Alias Rijavan
.....Applicant(s)
Versus
State Of U.P. Thru. Principal Secretary Home And
3 Others .....Opposite
Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Mohammad Shariq, Rajendra Kumar
Ratnakar, Sanjay Kumar Pal
Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Shreesh Srivastava
Court No. - 65
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. व मान दा क जमानत ना प आवेदक ओर से मु०अ०सं० 155/2025
, अ त धारा 64(1), 351(3) भारतीय य सं ता एवं धारा 3/4(2) पा ए ,
थाना डेरापुर, ला कानपुर देहात जमानत पर मु करने हेतु त या गया है।
2. आवेदक के न अ व , प वादी के न अ व एवं न अपर शास य
अ व को सुना तथा प वली का प शीलन या।
3. आवेदक के नअ व ने त त या आवेदक को इस करण गलत एवं
फ ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने क त अपराध का त न या है। थम सूचना
पो सात वस लं त है, इसका कोई समु त करण न या गया है। क त
पी ता रा अपने भारतीय नाग क सुर सं ता के बयान आवेदक के राचार का
का आ प आरो त न या गया है, अ तु राशय के तहत अपने व 183 भारतीय
नाग क सुर सं ता के बयान राचार का आरोप आ त कर या गया है। इससे
प ल त है क त पी ता के धारा 180 व 183 भारतीय नाग क सुर सं ता पर र
रोधाभाष है। आगे यह भी कहा गया क त पी ता के यप ण प के
अनुसार अ योजन कथानक का सम न न हो रहा है। इस ए, आवेदक जमानत पर मु
ये जाने यो है। पुनः उनका कथन है आवेदक ओर से यह आ सन या गया है
वह कानून या सहयोग करने के ए तैयार है और जब भी आव कता होगी वह
ईमानदा से अदालत के सम खुद को उपल कराएगा और उन सभी श को कार
करने के ए भी तैयार है जो यालय उस पर अ रो त करेगी। आवेदक ष है तथा वह
इस करण ० 17.08.2025 से कारागार है। इस ए, आवेदक को जमानत पर
छो या जाय।
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BAIL No. 43256 of 2025
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4. प वादी के नअ व एवं न अपर शास य अ व ने अ यु के जमानत
का बल रोध करते ए त त या अ यु रा का त अपराध संं य एवं
गंभीर कृ का है, इस ए अ यु को जमानत पर न छो जाय।
5. उभय प के नअ व के त के प एवं प वली पर उपल सारवान
त एवं प का सम प से अवलोकन करने के बाद, सबू कृ और सी
भी ठोस रोधा क साम अनुप एवं उपल साम से छे छा संभावना न
होने के त को देखते ए मे राय आवेदक को जमानत पर मु करने का उपयु आधार
है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर ना कोई णी ए ए आवेदक को उपरो व त अपराध
संबं त यालय संतु पर गत बंध-प एवं अ क धनरा के दो नीय
भू त करने पर तश के साथ जमानत पर छो या जाय।
1. आवेदक वेचना या प ण के दौरान अ योजन सा के साथ छे छा न करेगा।
2. आवेदक अ योजन सा व पी ता/ कायतक को डरायेगा/धमकायेगा न ।
3. आवेदक यालय के आदे का पालन करेगा, वह प ण के दौरान ना कोई
अनाव क गन ए यत पर यालय उप त होगा तथा प ण
ईमानदा से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर हा होने के बाद जमानत तं ता का पयोग नही करेगा
और सी भी अपरा क ग न होगा न कोई अपरा क कृ करेगा।
5. आवेदक या अ प से मामले के त से प त सी भी या
पु स अ का को कोई लोभन या धम न देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा
, सके कारण उ यालय त को उजागर करने से रत रहना पडे।़
7. उपरो श से सी के उ घन के मामले , चारण यालय आवेदक
जमानत यमानुसार र करने को तं है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.)
March 18, 2026
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High Court of Judicature at Allahabad
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